रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में बाढ़ में नष्ट हुई फसल के बाद अब खेत में कमल खिल गए हैं। बाढ़ के बाद खादर क्षेत्र में हजारों किसानों की फसलों की बर्बादी का मंजर चारों तरफ देखा जा सकता है। प्रभावित किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
पांच अगस्त को जब गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा तो गंगा नदी उफान पर आ गई। कई स्थानों से तटबंध को तोड़कर पानी बाहर आ गया। जिसने कई दिनों तक क्षेत्र में तबाही मचाई। खादर क्षेत्र में आई बाढ़ और बारिश के बाद किसानों की हजारों हेक्टेयर धान और गन्ने की फसलों बर्बाद कर दिया। कई जगहों पर धान की फसल पूरी तरीके से बर्बाद हो गई है। लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसल पीली पड़ने जड़ गलकर फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। बाढ़ के बाद अब खादर क्षेत्र में तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है।
खेतों में खड़ी धान की फसल तो पूरी तरह नष्ट हो गई है। खादर के किसान बरसात के दिनों में अक्सर बाढ़ से फसल बर्बादी झेलते हैं। इससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। कुछ किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बाढ़ आने से जहां फसल नष्ट होती है, तो वहां किसानों के खेतों का संतुलन भी बिगड़ जाता है। इसमें पानी में बहकर आने वाली सिल्ट जम जाती है और लेवल करने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा मिट्टी का कटाव होता है। इससे मिट्टी की ऊपरी और पोषक तत्व वाली परत बह जाती है। सरकार की ओर से मुआवजा न मिलने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
कई साल दर्द देती बाढ़
खादर क्षेत्र करीब दस हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल उगाई जाती हैं। जिसमें से 40 फीसदी किसान ठेके पर भूमि लेकर खेती करते हैं। जब बाढ़ आती है, तो एक ओर महंगे खर्चे से तैयार हुई फसल नष्ट हो जाती है। वहीं, ठेके के पैसे देने से उन्हें दोहरी मार का सामना करना पड़ता है। बाढ़ प्रभावित किसानों को इससे उबरने में कई साल लग जाते हैं।
मुआवजा मिले तो लगे जख्मों पर मरहम
स्थानीय किसान गुरप्रीत सिंह, विपिन चौधरी, चरण सिंह, नरवेर सिंह आदि का कहना है कि बाढ़ में धान की फसल नष्ट हो गई है। अब सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे का इंतजार है। अगर मुआवजा मिलेगा तो आगे की फसलों की तैयारी होगी।
सर्वे कराकर दिया जाएगा मुआवजा
बाढ़ में नष्ट हुई फसल का तहसील की टीम द्वारा सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और मुआवजा दिलाया जाएगा।
- सूर्यकांत त्रिपाठी, एडीएम वित्त एवं राजस्व