फिटजी कोचिंग सेंटर बंद होने के बाद बढ़ी टेंशन
अभिभावक बोले, बच्चों के नुकसान का गुनहगार कौन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ में इंजीनियरिंग की तैयारी करवाने वाले फिटजी कोचिंग इंस्टीट्यूट में हुई अनियमितताओं ने अभिभावकों की टेंशन बढ़ा दी है। मंगलपांडे नगर स्थित इंस्टीट्यूट के अचानक बंद होने से अभिभावक सकते में हैं। इंस्टीट्यूट में पंजीकृत 750 में से अधिकांश बच्चों की पूरी फीस भी डूब गई है। सेंटर की ओर से न तो कोई यह बताने के लिए तैयार है कि केंद्र अब संचालित होगा या नहीं और फीस वापस मिलेगी या नहीं। अभिभावकों का कहना है कि इन हालातों का जिम्मेदार कौन है। संबंधित अधिकारियों जांच कर ठोस कदम उठाने चाहिए।
फिटजी देश के प्रतिष्ठित कोचिंग इंस्टीट्यूट में से एक माना जाता रहा है। मेरठ सहित अन्य जिलों से भी इस इंस्टीट्यूट के अचानक बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं। गत वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए होने वाली नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर फैली तो कुछ कोचिंग इंस्टीट्यूट भी शक के दायरे में थे। दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में बरसात का पानी भरने से तीन छात्रों की मौत भी हो चुकी है। अब फिटजी कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों को कोचिंग को लेकर चिंता होने लगी हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के लिए कोचिंग का चयन कैसे किया जाए। बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं। दसवीं व बारहवीं पास करने के बाद अधिकांश बच्चे कोचिंग का रुख करते हैं। क्योंकि उन्हें या तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी होती या फिर किसी इंजीनियरिंग व मेडिकल की। ऐसे में फिटजी बंद होने के बाद अभिभावकों का कोचिंग सेंटरों से विश्वास उठने लगा है।
पढ़ाई प्रभावित होने के साथ आर्थिक संकट
फिटजी में पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता का कहना है कि सेंटर बंद होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हुई ही है साथ ही आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अधिकांश बच्चों के माता-पिता ने चार साल के कार्यक्रम के लिए पूरी फीस जमा कर रखी थी। इसमें कुछ ने तो लोन लेकर फीस जमा की है। इंस्टीट्यूट बंद होने की वजह से बच्चों पर पढ़ाई का प्रेशर भी आ गया है।
कोचिंग जरूरी ही नहीं, मजबूरी भी
हालांकि अभिभावकों का यह भी कहना है कि इन सब खामियों के बाद भी वह कोचिंग में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। वरना बच्चा पिछड़ जाएगा। अभिभावक शरद ने बताया कि नीट, जेईई और यूपीएससी की तैयारी घर पर भी हो सकती है, यह तर्क ठीक है। होशियार बच्चे बिना कोचिंग के पास होते हैं। लेकिन ऐसे बच्चे कम होते हैं। ज्यादातर बच्चे औसत होते हैं। नीट, जेईई जैसी परीक्षा में एडवांस सवाल पूछे जाते हैं, जिन्हें औसत स्तर का बच्चा घर पर प्रैक्टिस करके नहीं पास कर सकता। ऐसे में फिर उसे कोचिंग का रुख करना पड़ता है। ज्यादातर औसत बच्चों के लिए कोचिंग जरूरी और मजबूरी दोनों है। अरुण कहते हैं इस बात से मनाही नहीं है कि बच्चे घर पर सिविल सर्विस की पढ़ाई कर सकते हैंं, लेकिन जो तैयारी कोचिंग में एक-डेढ़ साल में होती है, वह घर की पढ़ाई में कम से कम चार साल में होगी। ऐसे में कोचिंग दिलवाना एक तरह की मजबूरी होती है।