- यूरिया को लेकर सहकारी समितियों हो रहे हैं हंगामे, आधार कार्ड से खाद चाहते हैं किसान
- जिले में 8598 मीट्रिक टन यूरिया और डीएपी 4922 और एनपीके 5037 मीट्रिक टन का स्टॉक
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कृषि का रकबा नहीं बढ़ा है। फिर भी पिछले साल के मुकाबले इस साल किसानों के नाम पर अधिक खाद की बिक्री हुई है। पिछले साल और इस साल एक अप्रैल से 15 जून तक यूरिया की बिक्री में 245 मीट्रिक टन का अंतर है। फिर भी सहकारी समितियों पर किसानों के हंगामे चल रहे हैं। किसानों के आरोप हैं कि यूरिया समय पर नहीं मिल रहा है। इसको लेकर प्रशासन के पसीने छूटे हैं।
प्रशासन दावा कर रहा है कि अभी भी जिले के गोदाम, निजी दुकानों पर यूरिया 8598, डीएपी 4922 मीट्रिक टन और एनपीके 5037 मीट्रिक टन जमा है। मेरठ जिले में गन्ना और धान खरीफ की मुख्य फसलें हैं। जनपद में लगभग 1,54,000 हेक्टेयर गन्ना और लगभग 14 हजार हेक्टेयर धान की फसल होती है। इनके अलावा अन्य सब्जी की भी फसलें हैं। मुख्य फसलों के अनुपात में डीएपी, एनपीके और यूरिया की आपूर्ति होती है।
विगत वर्ष और इस साल अप्रैल से जून तक यूरिया का लेखाजोखा
- 1 अप्रैल 2025 से 15 जून 2025 तक 31898 मीट्रिक टन,
-1 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक 32143 मीट्रिक टन,
104 बी पैक्स समितियों में से 85 पर गोदामों में भरा यूरिया
- जिले भर की 104 बी पैक्स समितियों से 85 पर गोदामों में यूरिया भरा बताया जा रहा है। बफर गोदाम और फुटकर पर 8598 मीट्रिक टन यूरिया है। जिसमें से निजी क्षेत्र की दुकानों पर 4409 मीट्रिक टन और सहकारिता समितियों पर 4189 मीट्रिक टन यूरिया है। जिले में 14 हजार हेक्टेयर धान की फसल के लिए 4922 मीट्रिक टन डीएपी और 5037 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है।
वर्जन-
- शासन के निर्देशानुसार सभी किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिले, इसके लिए रबी और खरीफ सीजन में किसान को प्रति हेक्टेयर अधिकतम 7 बैग यूरिया और 5 बैग डीएपी दी जा सकती है। गन्ने और धान का रकबा भी नहीं बढ़ रहा है, फिर भी अधिक खाद की बिक्री हो चुकी है। किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करके लागत को कम करना चाहिए। जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। समितियों पर यूरिया लगातार भेजा जा रहा है। - राजीव कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।