हिंदू समाज द्वारा मनाई गई पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद की रस्म तेरहवीं में पूर्व विधायक इमरान मसूद व शाजाद मसूद सहित परिवार के अन्य सदस्यों के शामिल होने पर उलमा ने कड़ा एतराज जताया है। उलमा का कहना है कि ऐसी रस्में मुस्लिमों के लिए हराम है। इसलिए उन्हें अल्लाह से तौबा करनी चाहिए।
बिलासपुर में हिंदू समाज द्वारा काजी रशीद मसूद की तेरहवीं कार्यक्रम में मंत्रोच्चारण के उपरांत शाजाद मसूद को पगड़ी पहनाई गई। रस्म तेरहवीं की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पर मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि इस्लाम में किसी दूसरे धर्म की परंपराओं को अपनाए जाने की सख्त मनाही है। हिंदू समाज के रस्म तेरहवीं के कार्यक्रम में मंत्रोच्चारण के बीच काजी रशीद मसूद के बेटे को पगड़ी पहनाया जाना इस्लाम के खिलाफ है। इसके लिए उन्हें अल्लाह से तौबा करनी चाहिए।
मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि गैर मजहबी तरीके से किसी मुस्लिम मरहूम को श्रद्धांजलि देना जहां इस्लाम में हराम है। वहीं, इस तरह के कार्यक्रमों में शिरकत करना भी नाजायज करार दिया गया है।
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उधर, पूर्व विधायक इमरान मसूद ने उलमा की प्रतिक्रिया पर कहा कि हम और हमारा अल्लाह बेहतर जानने वाला है, क्योंकि हम कलमे के मानने वाले लोग हैं। इसलिए हमें किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।
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