बच्चों के गैर इस्लामी नाम रखने को देवबंदी उलमा ने मजहब-ए-इस्लाम के एतबार से गलत बताया है। उलमा का कहना है कि ये मां बाप का फर्ज बनता है कि वे बच्चों के नाम इस्लामी रखें, क्योंकि नामों से ही मुस्लिम और गैर मुस्लिम की पहचान होती है।
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दरअसल बस्ती निवासी बदीउज्जमा सिद्दीकी कुछ दिनों पहले रामायण और गीता का पाठ कंठस्थ कर चर्चा में आए थे। मुस्लिम होने के बावजूद बदीउज्जमा हिंदू संस्कृति से इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने अपने बच्चों के नाम हिंदू बच्चों के नाम पर रखे हुए हैं। इस मामले पर मदरसा जामिया तुल कुदसियात लिल बनात के मोहतमिम मौलाना कारी आमिर कासमी का कहना है कि मजहब-ए-इस्लाम के एतबार से ये ठीक नहीं है। मुसलमानों को चाहिए कि वे गैर इस्लामी नाम रखने से बचें। क्योंकि यह इस्लामी तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि ये मां बाप की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों के ऐसे इस्लामी नाम रखें जिसके मायने भी अच्छे हों। तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि मुस्लिम बच्चों के नाम गैर इस्लामी रखना सरासर गलत है। इनके न तो कोई मायने होते हैं और न ही इनसे धर्म की कोई पहचान होती है। इसलिए मुसलमानों को गैर इस्लामी नाम रखने से बचना चाहिए और बच्चों के नाम मजहब-ए-इस्लाम के एतबार से रखने चाहिए। मौलाना रहमान कासमी ने कहा कि आजकल गैर इस्लामी नाम रखने का चलन तेजी के साथ चल रहा है। जो सही नहीं है। मुस्लिमों को चाहिए कि वे बच्चों के नाम इस्लामी रखें।
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