केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर जामिया मिल्लिया इस्लामिया का अल्पसंख्यक दर्जा खत्म करने की सिफारिश किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है।
देवबंद इस्लामिक एकेडमी के अध्यक्ष मौलाना मेहंदी हसन ऐनी कासमी का कहना है कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा कर बड़े बड़े बयान दिए थे। जिससे यह लगता था कि वह अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े हितैषी हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद एक-एक करके ऐसे फैसले लिए जिससे यह साबित होता है कि इनको अल्पसंख्यकों से नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तानियों से बैर है।
उन्होंने कहा कि अब वह जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक दर्जे को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। जो सरासर गलत है। उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने आपका क्या बिगाड़ा है। इसमें अगर मुस्लिम और दलित बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं तो इससे आपको क्या दिक्कत है?। साथ ही कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया वर्ष 1968 से सरकार के अधीन नहीं है, यह एक स्वतंत्र रूप से चलने वाली यूनिवर्सिटी है।
पढ़ें : विवादित कलेंडर से आगबबूला हुए देवबंदी उलमा, कहा- मुस्लिम धर्म स्वीकार करें हिंदू