वहीं जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि बेवजह तीन तलाक को मुद्दा बनाकर इसे सियासी लाभ के लिए तूल दिया जा रहा है। साफ है कि तीन तलाक का मसला शरीयत से जुड़ा है और संविधान कहता है कि हर धर्म के व्यक्ति को उसके मजहब के मुताबिक जिंदगी गुजारने का पूरा अधिकार है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह अपनी जिद छोड़कर इस मसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सुपुर्द कर दे।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि साजिश के तहत कुछ महिलाओं को सामने लाकर खड़ा कर दिया और दिखाया गया कि वह तीन तलाक का विरोध कर रही हैं, जबकि करोड़ों मुस्लिम महिलाएं इसकी एकसुर में मुखालफत कर रही हैं। यह बात समझ से परे है कि आखिर सरकार मुसलमानों की तरक्की को दरकिनार कर तीन तलाक के पीछे क्यों पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बिना वजह तूल देना बंद करना चाहिए और इस मुस्लिम धर्मगुरुओं पर छोड़ देना चाहिए।
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