पिछले वर्ष छह अगस्त को मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा से पकड़ा गया अब्दुल्ला अल मामून नाम का बांग्लादेशी भी वहां के आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला टीम का सक्रिय सदस्य था, जो देवबंद में काफी समय तक रहा। इसके बाद एटीएस ने फर्जी पासपोर्ट बनाकर रह रहे कुछ बांग्लादेशी की सूचना पर छापामार कार्रवाई की। जिसमें फैजान नाम का बांग्लादेशी फरार चल रहा है जो अब्दुल्लाह का ही साथी बताया गया। इसी साल गत दो जनवरी को देवबंद से वसीम अहमद और अहसान कुरैशी को बांग्लादेशी आतंकी यूसुफ अली के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसका पासपोर्ट बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मुरादनगर के ग्राम कुुर्सी में रह रहे बांग्लादेशी ने भी देवबंद से पासपोर्ट बनवा लिया था।
अक्तूबर 2017 में कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से बांग्लादेशी रजाउल रहमान को पकड़ा था, जो देवबंद में काफी समय से रह रहा था। उसके बाद लखनऊ के चारबाग स्टेशन से एटीएस ने इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस को पकड़ा, जो देवबंद के ग्राम भनैड़ा में काफी दिनों से रह रहे थे। पुलिस ने देवबंद से ही चार माह पूर्व म्यांमार निवासी जुनैद को गिरफ्तार किया। जिसमें फर्जी पासपोर्ट बनवाने के प्रयास में गिरफ्तार किया था। यह 11 साल से देवबंद में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसी पते पर उसने पासपोर्ट बनवा लिया। यह ऐसे मामले हैं जो सहारनपुर जनपद में आतंकी गतिविधियों को बयां करते हैं।
सुहेल के बारे में जुटाई जा रही जानकारी
एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए सुहेल के बारे में बताया गया कि उसने देवबंद में तालीम ली है। इसके बाद खुफिया एजेंसियां जानकारी जुटाने में लगी है कि वह किस मदरसे में पढ़ा था, हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। क्योंकि देवबंद में बड़ी संख्या में मदरसे हैं।
स्थानीय खुफिया एजेंसी होती हैं फेल
आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोग स्लीपर मॉड्यूल की तरह काम करते रहे हैं। चाहे देवराज सहगल उर्फ इकबाल हो या फिर बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़ा अब्दुल्ला। हर मामले में स्थानीय खुफिया एजेंसी पिछड़ती रहीं। कभी एटीएस, तो कभी एनआईए ने ऐसे लोगों की धरपकड़ की, लेकिन स्थानीय खुफिया इकाई ऐसे लोगों के बारे में पता करने में विफल रही हैं।
महत्वपूर्ण मामले
-- 1994 में तीन ब्रिटिश नागरिकों को बंधक बनाकर आतंकियों ने खाताखेड़ी में रखा था। इन्हें छुड़ाने गए इंस्पेक्टर ध्रुवलाल की मौत हो गई थी, कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
-- 1991 में लक्ष्मी सिनेमा में बम फटा था, जिसमें आठ से दस लोग मारे गए थे। उस समय घटना में आतंकियों का हाथ बताया गया था।
-- किफायत उल्लाह उर्फ जाफर अहमद उर्फ अताउर्रहमान उर्फ अल उल्लाह मोहल्ला कस्साबान सरसावा का रहने वाला था। जो बाद में जम्मू कश्मीर चला गया था, फिर हूजी का चीफ बना, फिर राजस्थान में रहा। उसके बाद बच्चों सहित पाकिस्तान चला गया और आज तक इसका कुछ नहीं पता चला।
-- 2005 में अयोध्या में हुए बम कांड में तीतरो के डाक्टर इरफान को पकड़ा।
-- 2001 में आतंकी गतिविधियों के चलते मुफ्ती इसरार को एक मदरसे से पुलिस ने पकड़ा।
-- दो अगस्त 2010 में देवराज सहगल उर्फ शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी को पटियाला से गिरफ्तार किया। उसने देवराज सहगल के नाम से सहारनपुर से लाइसेंस एवं दस्तावेज बनवा लिए थे।
-- छह सितंबर 2015 की रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीमों ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन के बाहर से हिजबुल इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी एजाज शेख को गिरफ्तार किया था।
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