प्रशासन देखेगा मामला
ये मामला प्रशासन को देखना है। अतिक्रमण हटने के बाद ही हम यहां काम शुरू कर पाएंगे।
- सुधीर शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआरटीसी
जमीन हमारी है
जमीन हमारी है, लेकिन तहसील के अभिलेखों में इसकी चौड़ाई क्या दर्ज है। ये देखने के बाद ही पता चलेगा। सभी निर्णय प्रशासन को लेने हैं।
- अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
किसानों की मांग नहीं मानी तो हाईवे पर बांधेंगे पशु
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अब किसानों का मुआवजे को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। 20 अगस्त तक का समय खत्म होने के बाद मेरठ के इलाके के किसानों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। बृहस्पतिवार को किसान नेताओं ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा गाजियाबाद जिलाधिकारी के अवकाश से लौटने के बाद अब कोई आश्वासन नहीं चलेगा। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त तक जमीन के मुआवजा का प्रकरण को निपटाने का वादा किया गया था।
सपा नेता पवन गुर्जर का कहना है कि जिलाधिकारी गाजियाबाद ने किसानों की मांगों को लेकर जो आश्वासन दिया था, यदि उन मांगों को अवकाश से लौटने पर पूरा नहीं किया गया तो अब और समय शासन-प्रशासन को नहीं दिया जाएगा। जिस पर किसान तत्काल ही रणनीति बनाकर एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य को पूरी तरह रुकवा कर हाईवे पर अपने पशुओं को बांधकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह सरकार पूरी तरह किसान विरोधी है। इस मौके पर किसान नेता महबूब अली, निशांत भड़ाना, जॉनी अच्छरौंडा, जयचंद भूड़बराल, हाजी जुनैद काशी मौजूद रहे।
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