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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण का काम ठप, 31 अगस्त तक पूरा होना था निर्माण, यहां फंसा पेच

Tue, 20 Aug 2019 06:03 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली से मेरठ का सफर सुहाना बनाने के लिए इंतजार लंबा होता जा रहा है। बारिश की वजह से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण का कार्य पूरी तरह थम गया है। तीसरे चरण का काम डासना से हापुड़ (22 किमी) तक पूरा हो चुका है। लेकिन चौथे चरण (डासना से मेरठ 32 किमी) के निर्माण कार्य पर बारिश ने पानी फेर दिया है। यह काम 31 अगस्त तक पूरा होना था। लेकिन जिस तरह से एक माह से निर्माण कार्य बंद है, उसे देखकर नहीं लगता कि यह कार्य नियत समय तक पूरा हो पाएगा।

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31 अगस्त से डासना से यूपी गेट तक खुलेगा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, 97 प्रतिशत काम पूरा

उधर, एनएचएआई ने यह भी दावा किया था कि डासना से मेरठ तक के इस हिस्से को अक्तूबर 2019 तक पूरा कर लेंगे। लेकिन अब बारिश और जमीन अधिग्रहण में आ रही समस्या को देखते हुए इस समय को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। रेल ओवरब्रिज और सर्विस रोड के लिए परतापुर तिराहे के पास तेजी से कार्य किया जा रहा था। परंतु बारिश की वजह से इस कार्य को भी रोक दिया गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर गड्ढे तालाब का रूप ले चुके हैं। अच्छरौंडा परतापुर में बन रहे टोल प्लाजा का कार्य भी ठप है। 
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यहां फंसा है पेच
इस चरण में कई स्थानों पर जमीन का पेच फंसा हुआ है। इसमें डासना, कुसालिया, नाहल, रसूलपुर सिकरोड शामिल हैं। इन चारों गांवों की जमीन का लगभग 50 करोड़ से अधिक का मुआवजा बांटा जाना है। लेकिन किसानों के विरोध के चलते यहां अभी बात नहीं बन रही है। इस मामले को लेकर कई बार किसानों और अधिकारियों की बैठक हो चुकी है।

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रैपिड और एक्सप्रेस-वे पर लखनऊ में बैठक
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रैपिड रेल और एक्सप्रेस-वे की समीक्षा के लिए लखनऊ में दो दिन बैठकों का दौर चलेगा। 20 और 21 अगस्त को होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए कमिश्नर, एमडीए उपाध्यक्ष आदि अधिकारी लखनऊ रवाना हो गए हैं। पहले दिन प्रमुख सचिव और दूसरे दिन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में दोनों प्रोजेक्ट की समीक्षा की जाएगी। सरकार की तरफ से इन दोनों प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार की विशेष नजर है। इसी को देखते हुए प्रोजेक्ट की राज्यस्तरीय समीक्षा की जा रही है। 

वहीं, मंडल स्तर पर भी कमिश्नर हर महीने बैठक कर समीक्षा करती हैं। लेकिन इसके बाद भी जमीन अधिग्रहण का पेच फंसा है। यह मामला वर्ष-2017 से चला आ रहा है।

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