दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे को लेकर भले ही अभी पहले चरण के लिए कांट्रेक्टर का चयन कर लिया गया हो, पर मेरठ का सपना पूरा होने में अभी समय लगेगा। दरअसल, पहले चरण के लिए ही ढाई साल का समय दिया गया है। हालांकि उस चरण का काम पूरा होने से पहले ही अन्य चरणों पर भी काम शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन अंतिम चरण में ही इतने पेंच अटके हैं कि चार साल से पहले यहां वाहनों का चलना मुश्किल है।
ये तीन चरण
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के पहले चरण के लिए मैसर्स वेलस्पन इंटरप्राइजेज से समझौता हो गया है। यह कंपनी पहले चरण पर काम करेगी और 15 साल तक इसका परिचालन भी करेगी। पहले चरण में दिल्ली स्थित रिंग रोड से यूपी बॉर्डर यानी लगभग 8.71 किमी हिस्से में काम होगा। दूसरे चरण में यूपी गेट से डासना तक काम होगा यानी 8.71 से आगे 27. 74 किमी तक निर्माण होगा। तीसरे चरण में डासना से हापुड़ 27. 74 से 49.34 किमी तक काम होगा।
मेरठ से कनेक्टिविटी मेें तमाम अड़चनें
डासना से मेरठ तक यह लगभग 36 किमी है। इस पर सबसे बाद यानी चौथे चरण में काम होगा। इस हिस्से को लेकर अड़चनें भी काफी हैं। पहले चरण के लिए ही वेलस्पन कंपनी को ढाई साल का समय काम पूरा करने के लिए दिया गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगले चरणों के लिए यह काम खत्म होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। बीच में ही कंपनियों से काम शुरू करने का करार कर लिया जाएगा। जैसे तीसरे चरण के लिए एक कंपनी का नाम प्रस्तावित हो चुका है। यह मान भी लिया जाए तो भी मेरठ से संचालन में कम से काम चार साल का समय लगेगा। इससे पहले दूसरे चरण पर काम शुरू करना होगा। इसके लिए भी अभी कांट्रेक्टर फाइनल नहीं हुए हैं।
मांगे 570, मिले सौ करोड़
राष्ट्रीय राज्यमार्ग विकास प्राधिकरण की लेटलतीफी इसमें सबसे बडा अवरोध बनी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मेरठ जनपद में 13 गांवों की जमीन का अधिग्रहण हो चुका है, लेकिन अभी तक सभी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया है। प्रशासन ने एनएचएआई को लगभग 570 करोड़ रुपये का अवार्ड भेजा है, लेकिन मिला है केवल सौ करोड़ रुपये जो बांटा जा चुका है। यह पैसा आने में ही काफी समय लगेगा। इसके अलावा जनपद गाजियाबाद में भी यही हाल है। यहां के किसानों को भी अभी शत प्रतिशत पैसा नहीं बंटा है। जब तक दोनों जगह प्रशासन शत प्रतिशत जमीन लेकर नहीं दे देता, जब तक इसके लिए केंद्र सरकार कांट्रेक्टर घोषित नहीं करेगी।
समय तो लगेगा ही
यदि दोनों जिले की शत प्रतिशत जमीन देने और मुआवजा बांटने में एक साल लगा और टेंडर जारी हो भी गया तो भी निर्माण में कम से कम ढाई या तीन साल लगेेंगे। सरकार ने नौ किमी से भी कम हिस्से के लिए ढाई साल का समय दिया है। फिर डासना से मेरठ का हिस्सा तो लगभग 36 किमी का है। ऐसे में कम से कम चार साल से पहले तो यह निर्माण पूरा होने से रहा।