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Mission Election: मतदाता सूची से पांच लाख नाम कटे, मेरठ की राजनीति में हलचल, चुनावी गणित बदला

Mon, 20 Apr 2026 02:42 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से 5.06 लाख वोट काटे जाने से राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है। कई विधानसभा सीटों पर चुनावी गणित पूरी तरह बदलने की आशंका जताई जा रही है।

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एसआईआर के बाद बदलाव - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम केंद्र माने जाने वाले मेरठ जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद बड़ा बदलाव सामने आया है। जिले की मतदाता सूची से कुल 5.06 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने से राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया में 2.48 लाख महिला और 2.57 लाख पुरुष मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में वोट कम होने से आगामी विधानसभा चुनाव में जीत-हार का पूरा समीकरण बदल सकता है।

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महिला वोटरों की कटौती से बदलेगा साइलेंट वोटर का गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटने से चुनावी रणनीति पर खास असर पड़ सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई विधानसभा सीटें 5 हजार से 15 हजार वोटों के अंतर से तय होती रही हैं।

ऐसे में जब किसी एक सीट पर ही 50 हजार से लेकर एक लाख तक वोट कम हो जाएं, तो पुराने चुनावी आंकड़े अप्रासंगिक हो जाते हैं और राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनानी पड़ती है। यही वजह है कि मेरठ की सातों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के साथ-साथ मतदाता सूची में नाम जुड़वाने पर भी खास जोर दे रहे हैं।

मेरठ कैंट सीट पर सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों के मुताबिक मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यहां से 64,679 पुरुष और 57,036 महिला मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं।

यह सीट परंपरागत रूप से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है, लेकिन करीब सवा लाख वोट कम होने से यहां चुनावी मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।

दक्षिण और शहर सीट पर भी बड़ा बदलाव
मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से 55,892 महिला और 62,383 पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह सीट अक्सर कांटे के मुकाबले वाली मानी जाती है, इसलिए करीब 1.18 लाख वोट कम होना यहां निर्णायक साबित हो सकता है।

वहीं मेरठ शहर सीट से 29,533 महिला और 32,191 पुरुष मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। यह सीट ध्रुवीकरण वाली राजनीति के लिए जानी जाती है, जहां कई बार एक-एक वोट भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
 
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देहात की सीटों पर भी असर
मेरठ जिले की सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और किठौर विधानसभा सीटों पर भी औसतन 50 हजार से 60 हजार वोट कटे हैं। खासकर सरधना और किठौर जैसी सीटों पर जहां पिछले चुनाव में जीत का अंतर कम रहा था, वहां इतनी बड़ी कटौती प्रत्याशियों की चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटने के पीछे मुख्य कारण पलायन, पता बदलना, मतदाता की मृत्यु और दोहरा पंजीकरण बताया जा रहा है।
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