विधायक और प्रशासन के सदस्य रहेंगे कैंट बोर्ड बैठक में मौजूद, मुख्यमंत्री के संज्ञान में है मामला
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पीडब्ल्यूडी के स्वामित्व वाली रुड़की-मवाना और दिल्ली रोड पर कैंट बोर्ड द्वारा की जा रही वाहन प्रवेश शुल्क वसूली पर बृहस्पतिवार को फैसला होगा। अगर 11 स्थानों पर ही वसूली हुई तो हंगामे के आसार हैं। पूरा मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है, विधायक के साथ प्रशासन के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
सात दिसंबर 2019 से कैंट में छह की बजाय 11 जगहों पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूली का ठेका दिया गया था। विरोध-प्रदर्शन के बाद कैंट बोर्ड को फैसला वापस लेना पड़ा था, लेकिन 11 जगहों पर ठेका छूटने के चलते ठेकेदार को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी। पूर्व सीईओ ने इस बार भी 11 जगहों पर ही प्रवेश शुल्क वसूली का ठेका छोड़ दिया, जिस पर विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल अड़ गए। उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी, पूर्व उपाध्यक्ष बीना वाधवा समेत सभी सदस्यों ने भी कह दिया कि वह पार्टी के साथ हैं। विधायक का कहना है कि वह बैठक में शामिल होंगे। जनता के खिलाफ फैसले का विरोध करेंगे। वाहन शुल्क वसूली के ठेके के अलावा बैठक में ट्रेड लाइसेंस के मामले बढ़ाए जाने पर भी चर्चा होगी।
प्रशासन ने ठीक से नहीं रखा पक्ष
पिछली साल प्रशासन ने पूरे मामले में अपना पक्ष ठीक से नहीं रखा, जिसके चलते 11 स्थानों पर ही ठेका छूट गया। इस बार मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा है। ऐसे में प्रशासन के पक्ष पर ही सबकी नजरें हैं। साल 2006 में भी इन सड़कों पर टोल वसूली होने के बाद शहर में जब हंगामा हुआ था तो तत्कालीन डीएम ने अपने विशेषाधिकार से कैंट एक्ट 2006 की धारा 56 के अंतर्गत सभी बैरियर हटवा दिए थे। इस बार भी अगर कैंट बोर्ड नहीं मानता है तो डीएम अपने अधिकार से भी इन सड़कों से वसूली हटवा सकते हैं।
एजेंडा पास हुए बिना संभव नहीं
कैंट बोर्ड में सभी सिविल सदस्य मामले में विरोध करेंगे। प्रशासन की तरफ से भी पिछली बोर्ड बैठक में साफ कर दिया गया था कि उनकी तरफ से रुड़की-मवाना और दिल्ली रोड पर वसूली न हो। ऐसे में सिर्फ सेना के सदस्य ही बचते हैं। उपाध्यक्ष सभी सदस्यों के साथ अड़ जाएं तो 11 जगहों पर ठेका दिए जाने का प्रस्ताव पास होना मुमकिन नहीं है।
ठेके की शर्तों को नहीं किया पूरा
वाहन प्रवेश शुल्क देने वाले ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि कैंट बोर्ड अपने राजस्व के लिए वसूली तो करता रहा, लेकिन वसूली के स्थानों पर जो ठेके की शर्तें होती हैं, उनमें से एक को भी पूरा नहीं किया गया।
रक्षा संपदा विभाग खाली नहीं करा पाया जमीन
आरटीआई कार्यकर्ता ने पत्र लिखकर दी अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। हाईकोर्ट ने रक्षा संपदा विभाग को 100 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का आदेश दिया था। वह एक साल बाद भी खाली नहीं कराई गई है। इस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करने पर रक्षा संपदा विभाग और कैंट अधिकारियों को पत्र दिया है। इसमें कहा कि क्यों न अवमानना याचिका दायर कर दी जाए।
दिल्ली रोड पर रक्षा संपदा विभाग की करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन है। वर्ष 1979 में इस जमीन को टैक्सी स्टैंड के लिए लीज पर दिया था। वर्ष 1998 में इसकी लीज समाप्त हो गई। टैक्सी यूनियन की तरफ से रक्षा मंत्रालय से एनओसी ली गई थी। वर्ष 2008 में एनओसी निष्प्रभावी होने के बाद टैक्सी यूनियन से जमीन खाली करने के लिए कहा था। इस पर टैैक्सी यूनियन हाईकोर्ट चली गई थी। साल 2015 में घंटाघर पर टाउन हाल की मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव निरस्त हो जाने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में प्रस्ताव रखा था कि टैक्सी स्टैंड की जमीन पर मल्टीलेवल पार्किंग बना दी जाए तो कैंट और दिल्ली रोड पर पार्किंग की समस्या दूर हो सकती है। 20 अक्तूबर 2019 को हाईकोर्ट ने टैक्सी यूनियन की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद रक्षा संपदा विभाग को ये जमीन खाली करानी थी, परंतु एक साल बाद भी नहीं कराई। इस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने रक्षा संपदा अधिकारी और सीईओ को पत्र लिखा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जाए।
रैपिड के लिए हो इस्तेमाल
खुराना का कहना है कि रोडवेज वर्कशाप के पास रैपिड रेल का स्टेशन बनना है। इसके लिए यहां स्थित अशोका मार्केट के 45 दुकानदारों को हटाया जा रहा है। ऐसे में यदि रक्षा संपदा विभाग टैक्सी स्टैंड वाली जगह को खाली कराकर रैपिड के लिए दे तो 45 व्यापारियों का कारोबार बच जाएगा।