स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता फिर सामने आई है। गर्भवती महिला सुबह आठ बजे से आधी रात तक सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटती रही। लेकिन हालत बिगड़ने पर भी उसे समय पर इलाज नहीं मिला। जिंदगी और मौत के बीच झूलती महिला से रेफर का खेल खेला जाता रहा। नतीजा महिला के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु ने भी दम तोड़ दिया।
सकौती (दौराला) निवासी इस्लाम के पांच बच्चे हैं। उसकी पत्नी आसमीन (29) रविवार सुबह प्रसव पीड़ा के चलते आशा उर्मिला के साथ दौराला सीएचसी पहुंची। यहां महिला चिकित्सक ने परीक्षण के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस नहीं होने के कारण वह सीएचसी में ही करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पती रही। किसी तरह सरधना से एंबुलेंस बुलाकर उसे दोपहर में जिला अस्पताल में भर्ती कराया जा सका। दुश्वारी यहां भी कम नहीं थीं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने आसमीन और उसके गर्भ में पल रहे शिशु में से किसी एक की जान बचने की उम्मीद जताई।
इस पर इस्लाम ने पत्नी आसमीन की जान बचाने की गुहार लगाई। रात में महिला कर्मचारी प्रसव कराने लगे, मगर आसमीन की हालत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद ऑपरेशन करने की जानकारी दी गई। जिला अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने पर उसे आधी रात करीब तीन बजे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने आसमीन और उसके गर्भस्थ शिशु को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों ने मौत की वजह भी नहीं बताई। इसके बाद परिजन शव लेकर गांव लौट गए।
उन्होंने सोमवार सुबह उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया। मृतका के परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों की लापरवाही के चलते गर्भवती और शिशु की जान गई। वे इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, डीएम और सीएमओ से करेंगे। पीड़ित परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में सीएमओ से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया परंतु उन्होंने फोन तक रिसीव नहीं किया। उधर, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
शव ले जाने को तैयार नहीं हुए एंबुलेंस चालक
मेडिकल कॉलेज में पत्नी आसमीन की मौत की जानकारी पाकर इस्लाम शव गांव ले जाने की तैयारी करने लगा। उसने वहां मौजूद कई एंबुलेंस चालकों से चलने की गुहार लगाई, परंतु कोई तैयार नहीं हुआ। इसके बाद सोमवार तड़के चार बजे वह निजी वाहन में शव लेकर गांव के लिए रवाना हुआ।