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कोरोना का कहर: 18 घंटे तक घरों में पड़े शव, उठाने वाला कोई नहीं, पूरी रात एंबुलेंस में घायल बेटे को लेकर भटकती रही मां

Sun, 02 May 2021 06:10 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए भी अब कोई तैयार नहीं है। हर तरफ अव्यवस्था चरम पर है। परिवार के लोग भी कोरोना मृतकों से किनारा कर रहे हैं।
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शव को ले जाते कर्मचारी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ में शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए भी अब कोई तैयार नहीं है। हर तरफ अव्यवस्था चरम पर है। परिवार के लोग भी कोरोना मृतकों से किनारा कर रहे हैं। घरों से 12 से 18 घंटे बाद शवों को श्मशान घाट पहुंचाया जा रहा है। पांडव नगर में रिटायर्ड हाइडल कर्मी रामनाथ शर्मा की कोरोना के चलते शुक्रवार रात 11 बजे मौत हो गई थी, लेकिन सुबह नौ बजे तक उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया। अमर उजाला के प्रयास के बाद सामाजिक संगठनों के सहयोग से सुबह 11 बजे शव को श्मशान घाट पहुंचाया गया।

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पांडव नगर विकास समिति के अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि रामनाथ गीता दादा भाई सत्संग के सेवादार भी थे। उनका बेटा और पत्नी सरोज भी कोरोना पॉजिटिव हैं। समिति सदस्य हेमंत चौहान ने बताया कि उन्होंने नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों को घटना की सूचना दी, लेकिन शनिवार सुबह नौ बजे तक कोई मदद नहीं मिली। महेश शर्मा ने अमर उजाला से संपर्क किया। उसके बाद जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी और इंसानियत मानव सेवा समिति ने एंबुलेंस की व्यवस्था की। दुष्यंत रोहटा ने मृतक के बेटे के साथ मिलकर शव को एंबुलेंस में रखा। इस बीच कोई पड़ोसी नहीं आया। दुष्यंत ने कहा कि कोविड मृतकों के शवों की लगातार बेकदरी हो रही है। आसपास के लोगों का दायित्व बनता है कि अपने पड़ोसी के सहयोग के लिए आगे आएं।

पूरी रात एंबुलेंस में घायल को लेकर भटकती रही मां
बागपत रोड स्थित गंगा कॉलोनी निवासी घायल शुभम गुप्ता को उसकी मां पूरी रात एंबुलेंस में लेकर भटकती रही, लेकिन किसी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं किया। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद होप अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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शुक्रवार को शुभम हादसे में घायल हो गया था। पसली टूटकर फेफड़ों में घुस गई। किसी ने युवक को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया और परिजनों को सूचित किया। युवक की मां अनीता मेडिकल कॉलेज पहुंच गईं। युवक गैलरी में पड़ा था, लेकिन कोई डॉक्टर इलाज के लिए तैयार नहीं हुआ। जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों के प्रयास के बाद उसे रोहटा रोड बाईपास स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन पैसे की कमी के कारण तीन से चार घंटे बाद ही युवक को अस्पताल से निकाल दिया। रात में महिला ने जिलाधिकारी को फोन किया। उसके बाद एंबुलेंस में बेटे को लेकर पीड़िता महिला जिला अस्पताल पहुंची। यहां से उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज जाने के लिए कहा गया। रात भर महिला डॉक्टरों से गुहार लगाती रही। शनिवार सुबह पांच बजे सामाजिक संगठनों के लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच गए।

समिति अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा ने चेतावनी दी कि जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर युवक को स्ट्रेचर पर छोड़ दिया जाएगा। एंबुलेंस चालक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को सूचित किया। एंबुलेंस जेलचुंगी पर ही पहुंची थी इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों का फोन आ गया। होप नर्सिंग होम में युवक को भर्ती करने की बात कही गई। शनिवार दोपहर 12:00 बजे अस्पताल प्रबंधन घायल युवक को भर्ती किया।
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