पीड़ित परिवार के घर ग्रामीण मौजूद
- फोटो : अमर उजाला
छात्रा सोनी की हत्या को लेकर शामली से लेकर दिल्ली तक हंगामा है। नेता बयानबाजी कर रहे हैं, इंसाफ दिलाने की बड़ी बड़ी बातें हो रही हैं, लेकिन पीड़ित परिवार की तंगहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। एकतरफ बेटी की हत्या के गम में परिवार डूबा हुआ है, तो परिवार के पास आजीविका का कोई साधन न होने की वजह से दो वक्त की रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। इसी कारण पीड़ित परिवार ने अपनी भैंस तक बेचने का निर्णय लेना पड़ गया।
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गांव गढ़ी श्याम निवासी बीरसैन कश्यप मजदूरी करके परिवार को पालता है। परिवार को पास कृषि भूमि भी नहीं है। मजदूरी करके ही वह अपने बच्चों को पढ़ा भी रहा था, लेकिन 13 दिसंबर को जब उसकी बेटी सोनी की हत्या हुई, तो मजदूरी भी छूट गई। पांच दिन से बीरसैन मजदूरी पर नहीं जा पा रहा है। इस दशा में परिवार के पास रोटी खाने का भी संकट हो गया है। वहीं, हत्याकांड को लेकर शामली जिले लेकर सहारनपुर और दिल्ली तक कश्यप समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। गांव गढ़ी श्याम में पहुंचे नेताओं ने जमकर बयानबाजी की। हर नेता यही दावा करता रहा कि हम पीड़ित परिवार के साथ हैं, लेकिन किसी ने भी यह नहीं पूछा कि पीड़ित परिवार रोटी खा पा रहा है या नहीं। इसी के चलते सोमवार को बीरसैन कश्यप ने अपने घर के आंगन में बंधी दुधारू भैंस बेचने का निर्णय तक कर लिया। मजबूरीवश बीरसैन ने पशु व्यापारी को अपने घर बुलाया और 20 हजार रुपये लेकर भैंस का सौदा करना पड़ गया। छात्रा के चाचा सेठपाल का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि और सरकार ही पीड़ित की मदद नहीं कर रहे, तो ऐसी दशा में पशु तो बेचना ही पड़ेगा, नहीं तो परिवार को रोटी कहां से खिलाएंगे। क्योंकि बीरसैन के पास परिवार को पालने के लिए मजदूरी के अलावा कोई जरिया नहीं है और बेटी की हत्या के बाद बीरसैन मजदूरी पर भी नहीं जा रहा है।
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