दारुल उलूम देवबंद ने अपने एक अहम फतवे में ब्याज की रकम से गरीबों की मदद करने को जायज करार दिया है। मुफ्तियों की खंडपीठ ने कोरोना की वजह से देश में लागू लॉकडाउन के चलते विकट परिस्थितियों को देखते हुए ये फतवा दिया है। इससे पूर्व मुफ्ती शरीयत की रोशनी में ब्याज की रकम को हराम व नाजायज बताते रहे हैं।
कर्नाटक निवासी मोहम्मद उसामा ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग में लिखित सवाल किया था कि उनकी मस्जिद के बैंक अकाउंट में काफी रकम ब्याज की जमा है। वर्तमान में देश के भीतर कोरोना की वजह से लॉकडाउन लागू है जिसमें बहुत से गरीब लोग परेशान हैं और उनके पास खाने के लिए राशन तक नहीं है। ऐसी विकट परिस्थितियों में क्या उक्त ब्याज की रकम से जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।
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खंडपीठ में शामिल मुफ्ती-ए-आजम हबीबुर्रहमान आजमी, मुफ्ती महमूद बुलंदशहरी और मुफ्ती जैनुल इस्लाम आदि ने जवाब देते हुए कहा कि शरीयत में ब्याज हराम व नाजायज करार दिया गया है। बैंक में जमा रकम पर जो ब्याज मिलता है उसका इस्तेमाल खुद पर या मस्जिद में नहीं किया जा सकता ये दुरुस्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि शरीयत के हुक्म के मुताबिक देश में जिस तरह के हालात हैं उसको देखते हुए इस रकम से जरूरतमदों की मदद की जा सकती है, लेकिन इसमें सवाब की नीयत नहीं होनी चाहिए।
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