डेंगू और चिकनगुनिया से लोग अभी उबर भी नहीं पाए हैं कि अब स्वाइन फ्लू का डर सताने लगा है। ठंड बढ़ते ही स्वाइन फ्लू के दस्तक देने का अंदेशा है। जिसको लेकर शासन स्तर से अलर्ट जारी हुआ है। सरकार ने सभी सीएमओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए। सार्वजनिक जगहों पर बैनर व पोस्टर चस्पा किए जाएं। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के साथ समाचार पत्रों के जरिये सचेत किया जाए।
शासन और स्वास्थ्य मुख्यालय लखनऊ की तरफ से इतना विस्तृत अलर्ट कभी जारी नहीं किया गया है। क्योंकि अलर्ट में जारी की गई गाइड लाइन को जमीनी स्तर पर अमल में लाने के लिए हर सप्ताह रिपोर्ट तलब की गई है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग को बताना होगा कि उन्होंने इस अवधि में कहां और कितने जागरूकता अभियान आयोजित किए। माना जा रहा है कि डेंगू के मुद्दे पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद अब शासन हरकत में आया है। जिसको देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि सरकार यह भी मानकर चल रही है कि यदि इस बार स्वाइन फ्लू भी फैलता है तो ऐसी सूरत में मामला कोर्ट में जाने पर बचाव का रास्ता नहीं होगा।
गौरतलब है कि डेंगू को लेकर सरकार की तरफ से बजट खर्च न किये जाने और लोगों की मौत होने के गलत आंकड़े प्रस्तुत करने पर हाईकोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा किया था। हाईकोर्ट ने सरकार ने पूछ लिया था कि क्यों न प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाए। जिसके बाद सरकार उन अधिकारियों एवं चिकित्सकों की सूची बना चुकी है जिन्होंने डेंगू के लिए जारी बजट ही खर्च नहीं किया। वहीं, एसीएमओ डॉ. केपी सिंह का कहना है कि अलर्ट जारी किये जाने के बाद विभाग की तरफ से गाइड लाइन का पालन किया जा रहा है। जल्द ही बचाव को लेकर व्यापक अभियान चलाया जाएगा।