लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी में सभी पार्टियां लगी हुई है। ऐसे में भाजपा दलितों को साधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। लेकिन पश्चिमी यूपी में दलितों को साधना बीजेपी के लिए इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि जेल में बंद दलितों के दो बड़े नेता अब बाहर आ चुके हैं। जहां भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के पीछे दलित युवाओं की बड़ी ताकत है तो वहीं बसपा के पूर्व विधायक और दो अप्रैल के दलित आंदोलन में जेल गए योगेश वर्मा भी बसपा की बड़ी ताकत है। अब सवाल है कि क्या योगेश और चंद्रशेखर दलितों को एक करने में सफल होंगे?
अब दलितों के दोनों बड़े नेता जेल से रिहा
हाल ही में आपने देखा होगा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने समय से दो महीने पहले ही भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को जेल से रिहा कर दिया। चंद्रशेखर की रिहाई के बाद दलितों में खासा उत्साह भी देखने को मिला। यहां तक कि कई दिनों तक चंद्रशेखर के घर पर मिलने वालों का तांता लगा रहा और दिल्ली के मंत्री तक भी चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे। इससे पहले पिछले साल चंद्रशेखर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों के दलित युवाओं ने हिस्सा लिया था। इसमें खास बात यह थी कि एक ही बार में इतनी बड़ी भीड़ इकट्ठा करना कोई आसान काम नहीं था। हालांकि चंद्रशेखर ने इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था। सोशल मीडिया पर दलित युवाओं से अपील की थी कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में दलित युवा दिल्ली पहुंचे। जिसका असर देखने को भी मिला था। इतनी बड़ी संख्या में भीड़ को देख सभी राजनीतिक पार्टियों में हलचल पैदा हो गई थी। यही वजह है कि सहारनपुर हिंसा के बाद चंद्रशेखर दलितों का बड़ा नेता बनकर उभरा है।