बिसौला गांव में बृहस्पतिवार देर रात चकबंदी विभाग पुलिस बल के साथ निर्माणाधीन रविदास मंदिर पर पहुंचे। पुलिस ने चबूतरा तोड़कर यहां लगी प्रतिमा को रात के अंधेरे में उखाड़ दिया और अपने साथ ले गई। शुक्रवार सुबह जब मामले की जानकारी हुई तो दलित समाज में रोष उत्पन्न हो गया। आरोप है कि चकबंदी विभाग ने मिलीभगत कर खसरा संख्या बदल दी। जबकि, यह जमीन गांव के किसान के नाम है।
सवा बीघा जमीन उसने रविदास मंदिर के लिए दान दे दी
गांव निवासी राय सिंह ने बताया कि खसरा संख्या 660 पर उसकी 28 बीघा जमीन है। जिसमें सवा बीघा जमीन उसने रविदास मंदिर के लिए दान दे दी। इस जमीन पर समाज के लोगों ने चबूतरा बनाकर भगवान रविदास की प्रतिमा स्थापित कर दी। बृहस्पतिवार देर रात चकबंदी विभाग ने इस जमीन को जल निगम की जमीन बताते हुए थाना इंचौली पर शिकायत की और पुलिस बल के साथ आधी रात को मौके पर पहुंचकर चबूतरा तोड़ प्रतिमा को अपने साथ ले गई।
जानकारी समाज के लोगों को हुई तो लोग इकट्ठा हुए
शुक्रवार सुबह जब मामले की जानकारी समाज के लोगों को हुई तो लोग इकट्ठा होकर निर्माणाधीन मंदिर पर पहुंचे। आरोप है कि पिछले कई साल से रायसिंह जिस जमीन पर बुवाई कर रहे थे, उस जमीन का चकबंदी विभाग ने खसरा संख्या बदलकर 604 कर दिया। जबकि, इस जमीन पर पिछले कई साल से उनका नलकूप लगा हुआ है, बैनामा उनके पास है और समिति में इस जमीन पर बांड बना हुआ है। इस बार दौराला चीनी मिल ने उनकी जमीन को किराए पर लेकर यहां क्रय केंद्र भी स्थापित किया है।
जानकारी मिलने पर सपा नेता अतुल प्रधान भी समाज के लोगों के बीच पहुंचे और जल्द सीओ चकबंदी से मिलकर मंदिर बनाने का आश्वासन दिया। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि चकबंदी विभाग ने जमीन हड़पने की कोशिश की तो आंदोलन किया जाएगा।