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बैंक खाते में रकम भेजने का झांसा देकर ठग रहे साइबर अपराधी

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मेरठ। साइबर अपराधी नए-नए हथकंडों से लोगों को ठग रहे हैं। रकम भेजने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। मेरठ रेंज में इस वर्ष 650 से ज्यादा मामले साइबर अपराध के दर्ज हुए हैं। इनमें 85 फीसदी मामले ऐसे हैं, जिनमें लालच और जल्दबाजी में गोपनीय जानकारी शेयर करने पर लोग ठगी का शिकार बने।
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साइबर अपराधी पहले पीड़ित को फोन कर या सोशल मीडिया पर मेसेज भेजकर विश्वास दिलाते हैं कि उनके खाते में धनराशि ट्रांसफर की जानी है। इसके लिए वे पीड़ित को किसी लिंक पर क्लिक करने, अकाउंट डिटेल बताने या वॉलेट एप का पिन/ओटीपी शेयर करने को कहते हैं। यह जानकारी मिलते ही पीड़ित के खाते से रकम की निकासी हो जाती है। किसी भी हालत में अपना नेट बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन, कार्ड का सीवीवी नंबर या ओटीपी किसी के साथ शेयर न करें। बैंक कर्मी कभी भी यह जानकारी नहीं मांगते। -
केस-एक
शास्त्री नगर निवासी डॉ. शेफाली के पास कॉल आई। कॉलर ने खुद को आर्मी ऑफिसर बताते हुए उनका मकान किराए पर लेने के बारे में बात की। इसके बाद एडवांस किराया देने के बहाने डॉ. शेफाली के खाते से दो बार में अपने खाते में 1.19 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
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केस-दो
बेगमबाग निवासी ज्योति ने इंस्टाग्राम के माध्यम से ऑनलाइन 1750 रुपये कीमत का सामान खरीदा था। शाम को उनके पास कॉल आई और उनसे कहा गया कि आपका खरीदा सामान अभी स्टॉक में नहीं है। हम आपके रुपये वापस कर रहे हैं। उन्हें झांसा देते हुए साइबर ठगों ने अकाउंट से 35 हजार रुपये निकाल लिए।

केस-तीन
जेल रोड आशानगर निवासी शिवमपाल के पास अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉलर ने उन्हें ऑनलाइन खरीदारी करने पर फर्जी ऑफर दिखाकर लालच दिया। इसके बाद पीड़ित से साइबर अपराधियों पेटीएम के माध्यम से 50 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
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इन बातों का रखें ध्यान

अज्ञात नंबर/ईमेल से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
कॉलर की पहचान जांचें। बैंक/कंपनी का ऑफिशियल नंबर डायल कर कंफर्म करें।
कार्ड सीवीवी, यूपीआई पिन, नेट बैंकिंग डिटेल किसी के साथ साझा न करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखे तो खाता ब्लॉक कराएं और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय साइबर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।-
मनोस्थिति भांपकर हमला करते हैं साइबर अपराधी
सतर्कता और जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है। किसी भी प्रकार के वित्तीय लेनदेन से पहले दो बार सोचें। साइबर अपराधी पीड़ितों की मनोस्थिति भांपकर हमला करते हैं। बैंक/सरकारी अधिकारी, रिफंड या नौकरी के झांसे में कभी भी अपनी गोपनीय बैंकिंग डिटेल शेयर न करें। कोई भी वैध संस्था पिन, पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगती। अगर आपसे ये जानकारियां मांगी जा रही हैं, तो तुरंत फोन काटें और पुलिस को सूचना दें। -कलानिधि नैथानी, डीआईजी।
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