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Cyber Crime: लगातार बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामले, शिकार बनने से पहले हो जाएं सतर्क, रखें ये ध्यान

Mon, 16 Dec 2024 05:23 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में रिटायर्ड शिक्षिका को नो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इस तरह के मामले शहर में लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे कई मामले हैं जो हाल ही में सामने आए हैं। आप भी इसका जाने अनजानें शिकार हो सकते हैं। बेहतर है कि आप कुछ बातों का ध्यान रखें और सतर्क रहें।
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डिजिटल अरेस्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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मेरठ में साइबर अपराधियों ने रिटायर्ड शिक्षिका को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसने का डर दिखाकर नौ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। किसी से बात करने या मिलने पर जेल भेजने की धमकी देकर पीड़िता से 9,07,976 रुपये ठग लिए। साइबर ठगों की धमकी से घबराई पीड़िता ने बिना किसी को कुछ बताए बैंक, एफडी और पोस्ट ऑफिस से अपनी सारी जमापूंजी निकालकर बताए गए खातों में भेज दी। अब घर के खर्च के लिए भी पीड़िता के पास रुपये नहीं बचे हैं। साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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शिक्षिका को ऐसे बनाया शिकार
रेलवे रोड थाना क्षेत्र की न्यू प्रेमपुरी निवासी अंजू रानी सिंघल रिटायर्ड शिक्षिका हैं। साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए उन्होंने बताया कि 29 नवंबर को उनके पास सुबह करीब नौ बजे कॉल आई। कॉलर ने खुद को ट्राई (टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी चिराग ठाकुर बताया। कहा कि आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है।

आपकी आईडी पर हरियाणा के गुरुग्राम से मोबाइल सिम लिया गया है। इस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। इसके लिए आपको गिरफ्तार किया जा सकता है। आरोपी ने हरियाणा पुलिस के सीनियर अफसर रणबीर सिंह से बात कराने के लिए कहा। पीड़िता के नंबर पर वीडियो कॉल आई। रणबीर सिंह बता रहा व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था। 
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आरोपी ने कुछ निजी जानकारी लेने के बाद कॉल कथित एसआई अनुराग चहल को ट्रांसफर कर दी। अनुराग चहल लगातार उन्हें कॉल और मेसेज करता रहा। उसने कथित रघुनाथ पांडे को अपना सीनियर बताते हुए वीडियो कॉल पर बात कराई। रघुनाथ पांडे ने कहा कि आपका नाम नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। हम जांच कर रहे हैं। 
आपको सारा बैंक बैलेंस और एफडी आदि रकम हमें ट्रांसफर करनी होगी। जांच के बाद सारी रकम आपके खाते में वापस भेज दी जाएगी। आपकी एफडी समय से पहले टूटेगी तो उसका हर्जाना आरबीआई भरेगा। करीब 3:35 मिनट तक वह लगातार वीडियो कॉल पर बात करता रहा। 

ऐसे शिकार बनाते हैं साइबर ठग
साइबर ठग अब पढ़े लिखे लोगों को भी अपने भावनात्मक और फर्जी आधिकारिक जाल में फंसाकर उनकी पसीने की गाढ़ी कमाई को एक झटके में लूट रहे हैं। इस पूरी लूट का चिंताजनक पक्ष यह है कि डिजिटल अरेस्ट का शिकार ज्यादातर वो लोग हो रहे हैं, जो बुजुर्ग हैं और आमतौर पर कानून और व्यवस्था का सम्मान करने वाले हैं। ये अभी भी मानते हैं कि नियम कायदे, सरकारी दस्तावेज और आधिकारिक संस्थाएं फर्जी नहीं हो सकतीं। दुर्भाग्य से इसी सकारात्मक सोच का नाजायज फायदा साइबर अपराधी धड़ल्ले से उठा रहे हैं।

अपराधी अपनाते हैं ये तरीका
डिजिटल अरेस्ट करने के लिए आपको अचानक ही एक फोन कॉल आएगा। जिसमें कॉलर बताएगा कि आपने अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित पार्सल भेजा था या आपको यह मिला है यानी आपने इसे रिसीव किया है। कई बार आपको टारगेट करने के लिए यह फोन कॉल आपके रिश्तेदारों या दोस्तों को भी जा सकती है, जिन्हें बताया जाएगा कि आपके दोस्त या आपके रिश्तेदार ऐसे  अपराध में शामिल हैं। आपको जैसे ही दोस्त या रिश्तेदार से यह सूचना मिलेगी, आप घबरा जायेंगे।

एक बार टारगेट सेट करने के बाद अपराधी आपको स्काइप या किसी अन्य वीडियो कॉलिंग सिस्टम से आपसे संपर्क करेंगे। वो खुद को कानूनी अधिकारी, पुलिस या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश करेंगे। सरकारी वर्दी में भी दिखेंगे। वीडियो कॉल में आप उन्हें किसी फर्जी पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय में बैठे दिखेंगे ताकि आपको विश्वास हो जाए। आपसे वो "समझौता" करने या "मामले को बंद करने" के लिए पैसे मांगेंगे, लेकिन पैसे तभी मांगे जाएंगे, जब आप मजबूर हो चुके होंगे। 

 

मेरठ में अब तक ये मामले आए सामने
-10 दिसंबर को पल्लवपुरम निवासी महिला वैज्ञानिक डॉ. निशा वर्मा के पास एक नंबर से कॉल आई। साइबर अपराधियों ने उन्हें मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी देकर 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। उनके बच्चों को जान का खतरा बताकर डराया और ऑफिस से छुट्टी करा दी। उनसे 8.30 लाख रुपये खातों में ट्रांसफर करा लिए।  

-आठ नवंबर को नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्री नगर निवासी सीडीए से रिटायर एससी जैन के पास अनजान नंबर से कॉल आई थी। मानव अंगों की तस्करी और 68 लाख की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी देकर उन्हें पांच दिन घर में डिजिटल अरेस्ट रखा। अपने खाते में उनसे 15 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए थे।

-नौ नवंबर को गंगासागर निवासी रूड़की इंजीनियरिंग कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर ने रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें बताया कि उन्होंने और पत्नी ने सोशल मीडिया पर शेयर ट्रेडिंग में बड़ा मुनाफा कमाने का विज्ञापन देखा। इसके बाद शेयर ट्रेडिंग शुरू की। साइबर अपराधियों ने उन्हें लालचददेकर 3.10 करोड़ रुपये कर ली। 

-17 सितंबर को पांडव नगर बैंक से रिटायर्ड सूरज प्रकाश के मोबाइल पर कॉल आई थी। खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर साइबर ठगों ने पांच दिन तक सूरज प्रकाश और उनकी पत्नी सराेजबाला को घर में डिजिटल अरेस्ट कर चार खातों में 1.73 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए थे। 

-21 अगस्त को जागृति विहार द्वारका टावर निवासी डॉ. अनुज कुमार के पास व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। कॉलर ने खुद को सीबीआई अफसर बताते हुए मनी लॉड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। 
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ये बरतें सावधानी
-सीबीआई या क्राइम ब्रांच से कॉल आने पर तुरंत यूपी-112 या संबंधित थाने में फोन कर कंफर्म करें। 
-पुलिस या सीबीआई किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। ऐसी कॉल आने पर परिजनों और दोस्तों से तुरंत बात करें। 
-कोई पार्सल आने, उसमें ड्रग्स मिलने, मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ दिखाने, व्हाट्सएप पर वॉरंट भेजने वाले जालसाज हैं। इनसे डरे नहीं। 
-कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर गूगल से सर्च न करें। कंपनी की वेबसाइट से ही लें। 
-अनजान शख्स की ओर से भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और कोई एप डाउनलोड न करें। 

 
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