नौचंदी किसान मेले में अंग्रेजी शासन काल में भी किया जाता था किसानों का सम्मान, मेरठ मुद्रा महोत
मेरठ। प्रांतीय नौचंदी मेले में अब कृषि प्रदर्शनी नहीं लगाई जाती है, मगर अंग्रेजी शासन में इस मेले में किसानों को दिए जाने वाले मेडल मेरठ मुद्रा महोत्सव में शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं, 1966 में पुलिसकर्मियों को खेल में और बर्मा युद्ध में जवानों को दिए गए मेडल भी दर्शकों के लिए खास रहे।
दिल्ली रोड जगदीश मंडप में तीन दिवसीय मेरठ मुद्रा महोत्सव के अंतिम दिन रविवार होने के कारण काफी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनी में मेरठ के विजय आनंद अग्रवाल व प्रवीण जैन, अमित और सुमित, तुषार गर्ग, शोभित मित्तल व अंकित अग्रवाल ने भी सिक्के, एंटीक आइटम्स, प्राचीन सभ्यता से जुड़ीं वस्तुओं को प्रदर्शित किया। इस दौरान करंसी से लेकर सिक्के और कीमती वस्तुओं की बिक्री भी हुई।
प्रदर्शनी के आयोजकों में मनोज जैन, भानू भसीन, तुषार गर्ग ने सभी स्टॉल लगाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी में 50 से अधिक स्टॉल रहे। जिन विक्रेताओं को स्टॉल नहीं मिल पाए, वे लोग जगदीश मंडप के बाहर बैठकर एंटीक वस्तु और सिक्के बेचते नजर आए। मंडप के बाहर बैठे नाेएडा के विकास ने बताया कि स्टॉल की कीमत 30 हजार रुपये रही। स्टॉल न मिलने पर बाहर ही बैठना पड़ा। वहींं, आयोजक मनोज जैन ने बताया कि वह तीन साल में अब तक मुंबई, दिल्ली सहित अन्य शहरों में प्रदर्शनी लगा चुके हैं। यहां की प्रदर्शनी भी सफल रही।
मौर्य काल के सिक्कों में दिखा श्रीराम दरबार
एक स्टॉल पर प्रवीण जैन ने चंद्रगुप्त मौर्य का सिक्का दिखाया। उन्होंने बताया कि इस सिक्के की कीमत लाखों में हैं। इस पर श्रीराम दरबार बना है। इस दौरान उन्होंने कुशान युग, मोहम्मद गोरी, अल्तमश शासन काल के सिक्के भी प्रदर्शित किए। इस दौरान पांचाल काल के पीतल के सिक्के भी आकर्षण का केंद्र रहे।