चार दिनों से लापता अब्दुल्लापुर के सीमेंट व्यापारी दो भाइयों का मामला शनिवार को यू टर्न ले गया। एसपी देहात ने दोनों भाइयों के पार्टनर के हवाले से दावा किया कि दोनों भाई उधार और ब्याज के करोड़ों रुपये लेकर पूरी प्लानिंग के साथ गायब हुए हैं। सुसाइड नोट में जानी गंगनहर में कूदकर जान देने की जो बात लिखी गई, उसे पुलिस ने देनदारी से बचने की कोशिश बताया है। वहीं, गंगनहर में चल रहा सर्च अभियान भी शनिवार को एसएसपी के निर्देश पर बंद कर दिया गया।
एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन के अनुसार भावनपुर थाना क्षेत्र के अब्दुल्लापुर निवासी सीमेंट व्यापारी जितेंद्र, उनका छोटा भाई रविंद्र, उसकी पत्नी क्षमा और बेटा ऋषभ बीती 14 सितंबर की रात अपने घर और ऑफिस में सुसाइड नोट छोड़कर लापता हो गए थे। सुसाइड नोट में लिखा था कि चारों लोग रिश्तेदारों के उत्पीड़न और सूदखोरों से तंग आकर जानी स्थित गंगनहर में कूदकर जान दे रहे हैं। उनकी मारुति कार 15 सितंबर की सुबह गंगनहर के पास लावारिस मिली थी। इनके सबसे बड़े भाई चतरसेन मित्तल की सूचना पर पीएसी और एनडीआरएफ के गोताखोरों द्वारा तभी से गंगनहर में सर्च अभियान चलाया जा रहा था।
शनिवार सुबह एसएसपी जे. रविंदर गौड़, एसपी देहात प्रवीन रंजन, कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनय प्रधान और चतरसेन मित्तल सहित करीब 25-30 लोगों के सामने जितेंद्र के पार्टनर अजय सैनी निवासी फूलबाग कॉलोनी ने चौंकाने वाली जानकारी दी। अजय ने बताया कि बीती बुधवार रात 11 बजे रविंद्र, उनकी पत्नी और बेटे को खुद जितेंद्र ने कार से परतापुर छोड़ा था। उसके बाद जितेंद्र ने कार जानी गंगनहर छोड़ दी थी। जहां से मैं स्कूटर से जितेंद्र को लेकर परतापुर पहुंचा था।
अजय ने पुलिस अफसरों के सामने दावा किया कि दोनों भाइयों के पास बैग थे। जिन्होंने मुझे कोलकाता या मद्रास जाने की बात कही थी। मुझे कसम भी दिलायी दी थी कि यदि यह बात किसी को बतायी तो हम चारों लोग नहर में कूद जाएंगे। इस सच को छिपाकर अगले दिन अजय भी पुलिस के साथ नहर में सर्च अभियान में जुट गया था।