बागपत में उत्तर प्रदेश फसल ऋण मोचन योजना धरातल पर उतरते ही सवालों से घिरने लगी है। वादा एक लाख रुपये की ऋण माफी का किया, लेकिन पहली लिस्ट में सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनका एक सौ रुपये से भी कम कर्ज माफ किया गया है।
वजह यह कि किसानों के ऋण खातों में रुपये जमा होते ही बैंक अपने कर्ज को चुकता करने के लिए क्रेडिट कर लेते हैं। कर्ज के तौर पर जो चंद रुपये बचे, उन्हें कर्ज माफी की सूची में शामिल किया है।
ऐसे लघु और सीमांत किसान जिन्होंने 31 मार्च 2016 से पहले बैंकों से फसली ऋण लिया, उन्हें कर्ज माफी के दायरे में रखा है। पहले पात्र किसानों की सूची बनाने में सरकार के पसीने छूटे। अब लाभार्थी किसानों की तस्वीर साफ होने लगी तो इसमें ऐसे किसान भी शामिल हैं, जिनका ऋण सिर्फ नाम के लिए ही माफ हुआ है। लुहारा गांव के किसान सत्यपाल सिंह के 12 रुपये, काठा गांव के धीरज के 14. 38 रुपये, डौला गांव के जफरू के 214. 33 रुपये, फैजपुर निनाना गांव के तेजपाल सिंह के 108 रुपये, हिसावदा गांव के सौराज सिंह के 156.61 रुपये, नैथला गांव के महेश के 20.66 रुपये, पाली गांव के तेजपाल सिंह के 959 रुपये ही माफ किए। जो वजह सामने आई है, वह यह है कि बैंक बचत खाते में रुपये जमा होते ही अपने कर्ज में एडजेस्ट कर लेते हैं। किसान इस तरह के खातों में आमतौर पर रुपये जमा करने से बचते हैं। चंद रुपये जिन किसानों पर कर्ज बचा, उसे ऋण माफी में शामिल किया गया है।