मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को निरीक्षण करने पहुंची एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) टीम जब इमरजेंसी में पहुंची तो हैरत में पड़ गई। टीम के सदस्यों ने सवाल किया कि आखिर 150 करोड़ से बनी इमरजेंसी में डिजिटल एक्स-रे मशीन क्यों नहीं है। चिकित्सकों से पूछा गया कि आखिर बिना डिजिटल एक्सरे मशीन के मरीजों को बेहतर इलाज कैसे दिया जा रहा है। इस दौरान ऑडिटोरियम में बुलाकर डॉक्टर और स्टॉफ की हाजिरी भी लगाई गई।
हाजिरी के दौरान डॉक्टरों की संख्या में 20 प्रतिशत की कमी मिली है। मेडिकल में मिली खामियों और चिकित्सकों की कमी का असर सीधे तौर पर एमबीबीएस की सीटों पर पड़ सकता है। एमसीआई सीटों की संख्या में कटौती कर सकती है। फैकल्टी में आमतौर पर 10 प्रतिशत की कमी को नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन यहां सीटों की संख्या में दो गुने का अंतर है। फैकल्टी की कमी का असर एमबीबीएस के साथ पीजी की सीटों पर पड़ सकता है। पिछले दिनों एमसीआई ने कॉलेज में एमबीबीएस की सीट 100 से बढ़ाकर 150 की थी। इस दौरान टीम ने सर्जरी, मेडिकल कॉलेज परिसर और आई वार्ड का भी निरीक्षण किया। इन वार्डों में बेड की संख्या कम होने पर टीम ने आपत्ति जताई। कई वार्डों में टीम ने सुधार के लिए निर्देश दिए। टीम के होने की वजह से कॉलेज और अस्पताल में अधिकारी और कर्मचारी सतर्क रहे। सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर पहले ही तैयारी की गई थी। इस दौरान निरीक्षण के लिए पहुंची तीन सदस्यीय टीम को कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. एसके गर्ग, डॉ. विनय अग्रवाल और डॉ. ज्ञानेश्वर टांक ने निरीक्षण कराया।