उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में दुष्कर्म का वीडियो वायरल होने से आहत पीड़ित युवती ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दुष्कर्म पीड़ित युवती के साथ आरोपियों ने करीब डेढ़ साल पहले दोस्ती की थी।
दोस्ती के बहाने भरोसा जमाया और मुलाकात का दौर शुरू किया, मगर युवती को अहसास नहीं था कि जिन्हें वह दोस्त समझ रही है, वह दोस्ती के लिबास में छिपे दरिंदों से कम नहीं है। बस इसी धोखे में युवती की जिंदगी तबाह हो गई।
दरअसल, गंगोह क्षेत्र में दुष्कर्म का वीडियो वायरल होने से आहत जिस युवती ने जान दी है, वह आरोपियों को काफी समय से जानती थी। दोस्ती के नाम पर आरोपियों ने युवती को अपने भरोसे में लिया। फिर मौका पाकर संबंध बनाए और वीडियो बना लिया।
बात यहीं तक नहीं रुकी। वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर युवती को ब्लैकमेल किया जाता रहा। लोक लाज के भय से युवती सब सहती रही, लेकिन जैसे ही युवती ने आरोपियों की बात मानने से इंकार किया तो आरोपियों ने वीडियो वायरल कर दी। इसे युवती सह नहीं पाई और जहर खाकर जान दे दी।
पुलिस के मुताबिक छानबीन में पता चला कि करीब डेढ़ साल से युवती आरोपियों के संपर्क में थी। शुरूआत में आरोपी दोस्ती और मुहब्बत का वास्ता देकर युवती के करीब आए और फिर मौका पाते ही उससे शारीरिक संबंध बनाए।
परिचित और पास के ही होने के कारण परिवार के लोग भी उनकी मंशा को नहीं भांप पाए। यदि यह पहले पता चल जाता तो शायद युवती की जान बच सकती थी। एसपी देहात अशोक कुमार मीणा बताते हैं कि यह गंभीर कृत्य है। पुलिस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगी।
किशोरों ने ही कर दी थी वीडियो वायरल
कुछ सप्ताह पहले ही देहात कोतवाली क्षेत्र की एक कॉलोनी की किशोरी को अगवा करने के बाद तीन किशोर उसे थाना सदर क्षेत्र के एक मकान में ले गए थे। वहां सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसका वीडियो वायरल किया गया।
हैरत की बात यह रही कि किशोरी और आरोपी एक ही कक्षा में पढ़ने वाले थे। इन्होंने भी दोस्ती के नाम पर किशोरी को बहलाने के बाद इस कृत्य को अंजाम दिया था। इसके अलावा देहात कोतवाली क्षेत्र में ही एक अन्य किशोरी से दुष्कर्म कर वीडियो वायरल किया। इन घटनाओं में आरोपी तो गिरफ्तार हो गए, मगर समाज में ऐसी घटनाएं शर्मनाक और चिंताजनक हैं।
किशोरावस्था के बाद से ही बच्चों पर रखे नजर
मनोरोग चिकित्सक डॉ. अमरजीत सिंह पोपली कहते हैं कि मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया के इस दौर में अभिभावकों को किशोरावस्था से ही बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि भटकने से पहले ही बच्चों को रोका जा सके।
अब यह भी ध्यान देना जरूरी है कि आपका परिचित, दोस्त या रिश्तेदार भी आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है, इसलिए किसी पर आंख मूंदकर भरोसा भी न करें। किशोर और युवा प्रयास करें कि जीवन में कुछ गलत महसूस हों तो समय रहते अभिभावकों से शेयर करें अन्यथा पछतावा के अलावा कुछ नहीं बचता है।