दो साल में बना लखपति
हरिशंकर ने बताया कि दो साल पहले उसने यह कार्य शुरू किया था। उसे एक आधार कार्ड बनाने पर 85 पैसे का लाभ मिलता था। आधार कार्ड को वह अभिनव के लिए बनाई गई वेबसाइट पर ऑनलाइन भेज देता था और अभिनव को जब रुपये मिल जाते थे तो वह उसके हिस्से के पैसे उसे ऑनलाइन भेज दिया करता था। इन पैसों को हरिशंकर अपनी पत्नी व चंडीगढ़ निवासी अपनी बहन के खाते में ट्रांसफर कर देता था। उन दोनों के खातों में हरिशंकर ने अपना मोबाइल नंबर डलवा रखा था। जिससे, वह घर बैठे ही नेट बैकिंग के जरिए पैसे खर्च कर लेता था। हरिशंकर के अनुसार दो साल में वह 20 से 22 लाख रुपये कमा चुका है।
सरगना की तलाश में जुटी साइबर सेल
फर्जी आधार कार्ड का भंडाफोड़ होने के बाद साइबर सेल बिहार पुलिस से संपर्क साधने में जुट गई है। ताकि, मुकदमें में हरिशंकर के साथ आरोपी बनाए गए अभिनव की भी जल्द गिरफ्तारी कर सके। पुलिस का मानना है कि अभिनव बाहर से आने वाले लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाता था। ताकि, उन्हें उस राज्य की नागरिकता मिल सके। अभिनव के साथ इस गिरोह में कौन कौन जुड़े है। इसको लेकर साइबर सेल जांच में जुट गई है।