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यूपी: फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दबोचा गया शातिर आरोपी, बिहार में बैठा गिरोह का सरगना

Thu, 19 Aug 2021 01:21 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने की लगातार शिकायत मिल रही थी। सर्विलांस टीम ने छापा मारकर फर्जी आधार कार्ड बनाते हुए आरोपी को पकड़ा। पुलिस ने उसके पास से पांच लैपटॉप, पांच मोबाइल आदि सामान बरामद किए।
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आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कई राज्यों में फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का सर्विलांस सेल और पल्लवपुरम पुलिस ने छापा मारी कर भंडाफोड़ किया। एक आरोपी को हिरासत में लेकर उसके घर से लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बार कोड स्कैनर समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है। 

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फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने की लगातार शिकायत मिल रही थी। मंगलवार देर रात सर्विलांस टीम को मोदीपुरम की दुर्गा कॉलोनी स्थित एक मकान में आधार कार्ड बनाए जाने की सूचना मिली। जिस पर टीम ने पल्लवपुरम पुलिस के साथ मिलकर दुर्गा कॉलोनी में हरिशंकर के यहां छापा मारा। छापे के दौरान हरिशंकर फर्जी आधार कार्ड बनाते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने उसके पास से पांच लैपटॉप, पांच मोबाइल, एक हार्ड डिस्क, एक बारकोड स्कैनर, दो लैपटॉप चार्जर, आधार कार्ड के भारी मात्रा में प्रिंट आउट बरामद किए। पुलिस ने पूछताछ के बाद हरिशंकर के विरूद्घ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। पल्लवपुरम थाना प्रभारी देवेश शर्मा का कहना है कि सरगना की तलाश की जा रही है।

रोजाना बना रहा था डेढ़ हजार फर्जी कार्ड
फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले दुर्गा कॉलोनी निवासी हरिशंकर ने बताया कि उसके पिता सीताराम मोदीपुरम स्थित टायर फैक्टरी में काम करते थे। उनकी मृत्यु के बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उस पर आ गई। जिस पर उसने एक एजुकेशन सेंटर पर कार्य करना शुरू किया। दो साल पहले उसके फोन पर एक दिन एक फोन आया। जिसने अपना नाम अभिनव निवासी बिहार बताया। उसने एक सॉफ्टवेयर बनाने के लिए उसे 40 हजार रुपये देने की बात कहीं और उसने सॉफ्टवेयर बना दिया। जिसके बाद अभिनव ने उसके खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अभिनव का दोबारा फिर फोन आया और फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए उससे बात की। जिस पर दोनों मिलकर कार्य करने लगे। अभिनव ऑनलाइन उसे आधार कार्ड बनाने का ब्यौरा भेजता था। हरिशंकर ने बताया कि वह प्रतिदिन 15 सौ से दो हजार आधार कार्ड बनाता था। 

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दो साल में बना लखपति
हरिशंकर ने बताया कि दो साल पहले उसने यह कार्य शुरू किया था। उसे एक आधार कार्ड बनाने पर 85 पैसे का लाभ मिलता था। आधार कार्ड को वह अभिनव के लिए बनाई गई वेबसाइट पर ऑनलाइन भेज देता था और अभिनव को जब रुपये मिल जाते थे तो वह उसके हिस्से के पैसे उसे ऑनलाइन भेज दिया करता था। इन पैसों को हरिशंकर अपनी पत्नी व चंडीगढ़ निवासी अपनी बहन के खाते में ट्रांसफर कर देता था। उन दोनों के खातों में हरिशंकर ने अपना मोबाइल नंबर डलवा रखा था। जिससे, वह घर बैठे ही नेट बैकिंग के जरिए पैसे खर्च कर लेता था। हरिशंकर के अनुसार दो साल में वह 20 से 22 लाख रुपये कमा चुका है। 

सरगना की तलाश में जुटी साइबर सेल
फर्जी आधार कार्ड का भंडाफोड़ होने के बाद साइबर सेल बिहार पुलिस से संपर्क साधने में जुट गई है। ताकि, मुकदमें में हरिशंकर के साथ आरोपी बनाए गए अभिनव की भी जल्द गिरफ्तारी कर सके। पुलिस का मानना है कि अभिनव बाहर से आने वाले लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाता था। ताकि, उन्हें उस राज्य की नागरिकता मिल सके। अभिनव के साथ इस गिरोह में कौन कौन जुड़े है। इसको लेकर साइबर सेल जांच में जुट गई है। 
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