बागपत में खेकड़ा पुलिस ने मुठभेड़ के बाद आवारा गोवंशीय पशुओं को नशीला इंजेक्शन देकर वध करने करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से तमंचे, कारतूस, छुरी, नशीली दवा और कार बरामद की। गिरोह का सरगना फरार है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। इसके बाद कोर्ट से उन्हें जेल भेज दिया।
एएसपी रणविजय सिंह ने बताया कि खेकड़ा थानाध्यक्ष संजीव कुमार फोर्स के साथ डूंडाहेड़ा बाईपास के पास चेकिंग कर रहे थे। इसी समय सेंट्रो कार को पुलिस ने रुकवा लिया। कार में सवार दो युवकों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने किसी तरह से जान बचाई। पुलिस ने दोनों को घेरकर पकड़ लिया। कार की तलाशी ली गई तो कार से दो तमंचे, कारतूस, छुरी, फरसा, चार सीरिंज, 10 निडिल, नशीली दवा की शीशी, रस्सा, प्लास्टिक बैग, सेंट्रो कार बरामद हुई। पकड़े गए आरोपी इमरान निवासी नूर मस्जिद मुस्तफाबाद खजूरी दिल्ली, मुजब्बिर रहमान निवासी एल ब्लॉक थाना नंदनगरी दिल्ली के रहने वाले हैं। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी नफीस गिरोह का लीडर है।
उनका गिरोह बागपत, गाजियाबाद, मेरठ आदि जनपदों में सड़कों पर घूमने वाले आवारा गोवंशीय पशुओं का कटान करता है। रात में आवारा गोवंशीय पशुओं को नशीला इंजेक्शन देकर बेहोश कर देते हैं और उसके बाद वध करते हैं। मांस को दिल्ली ले जाकर बेचते हैं। उन्होंने बागपत और बड़ौत में गोकशी की कई घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने गैंग लीडर नफीस की तलाश में दबिश दी। लेकिन वह फरार हो गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। कोर्ट से उन्हें जेल भेज दिया। एएसपी ने बताया कि गैंग लीडर के पकड़े जाने के बाद किस-किस गांव में गोकशी की घटनाएं की। इसका पता चलेगा।
मांस को बोरे में डालने के मिले थे 500 रुपये
पकड़े गए आरोपी नफीस ने बताया कि वह कपड़े सिलाई का काम करता है। कई माह पहले दिल्ली के लिए मुस्तफाबाद निवासी नफीस उसे मिला। गोकशी करने की योजना उसे बताई और कहा कि मांस को उठाकर प्लास्टिक के बोरे में डालना है। इसके लिए उसे 500 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। वह उसके गिरोह में शामिल हो गया।
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