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यूपी: ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार, लोगों को ऐसे फंसाते थे अपने जाल में

Sun, 23 Jun 2019 12:29 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर पुलिस ने तंत्र विद्या से लोगों को उनके घरों में गड़ा सोना निकालने का प्रलोभन देकर मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एक मारुति कार, मिट्टी से भरे लाल कपड़ा बंधे पांच मटके, चांदी के नौ सिक्के, दो पीली धातु के गुटके और 90 हजार रुपए बरामद किए गए हैं। 

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शनिवार को थाना चिलकाना में एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि हरियाणा के जगाधरी निवासी जगदीश ने पांच दिन पूर्व थाना चिलकाना में दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने झांसा देकर उसके घर में गड़ा सोना निकालने की बात कही थी। 

थाना चिलकाना प्रभारी मनोज चौधरी, एसआई शाह आलम, कांस्टेबल दीपक और हरेंद्र धामा ने चेकिंग के दौरान सुल्तानपुर बाईपास मंडी समिति के निकट दो लोगों को हिरासत में लिया। पकड़े गए दोनों व्यक्ति विनोद पुत्र सुमेर चंद निवासी सीकरी खुर्द और जाकिर उर्फ भूरा पुत्र गफूर निवासी मोहल्ला कोठी वाला सुल्तानपुर ने पुलिस को बताया कि वह अपनी तंत्र विद्या के जाल में फंसाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। उनके घरों में सोना गड़ा होने का प्रलोभन देकर मोटी रकम वसूलते हैं।

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वहीं दोनों ने पुलिस को बताया कि जगाधरी निवासी जगदीश को उसके घर में सोना गड़ा होने का प्रलोभन देकर उससे तीन लाख रुपए वसूले थे। पुलिस को विनोद के कब्जे से एक 315 बोर का तमंचा, दो कारतूस और 90 हजार रुपए बरामद हुए, जबकि जाकिर उर्फ भूरा के पास से चांदी के नौ सिक्के, दो पीली धातु के गुटके, एक डिब्बी कस्तूरी और सौ रुपए बरामद हुए। दोनों के पास से एक मारुति 800 कार मिट्टी से भरे लाल कपड़े से बंधे पांच मटके भी बरामद हुए हैं। 

थाना प्रभारी मनोज चौधरी ने बताया कि दोनों लोग क्षेत्र में घूमकर लोगों को उनके घरों में धन गड़ा होने की बात बताते थे और उस धन को तंत्र विद्या से निकालने की एवज में मोटी रकम वसूलते थे। 

ऐसे करते थे ठगी
दोनों ठग भोले भाले लोगों को उनके घर में धन गड़ा होने की बात कहते थे। ऐसे घर और परिवारों के सदस्यों की रेकी करते थे। उसके बाद ये देखते थे कि कौन सा परिवार उनके झांसे में आ सकता है। जिस परिवार का कोई भी जिम्मेदार सदस्य उनके झांसे में आ जाता था तो उसके माध्यम से परिवार के बाकी लोगों के मन में लालच भर देते थे। दैवीय और छुपा हुए धन के लालच में लोग उनकी बात मानना शुरू कर देते। इसका फायदा उठाकर ये लोग पहले झूठा तंत्र फैलाते और फिर ठगी कर फरार हो जाते। जग हंसाई के डर से अधिकांश लोग रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते थे।

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