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गोपी पारिया की बरसी पर था खूनखराबे का ऐलान

Tue, 26 Mar 2019 03:29 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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बसपा कार्यकर्ता गोपी पारिया के हत्या के बदले में मोनू गुर्जर को मारना आरोपियों की सोची समझी साजिश है। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार मोनू का शव घर पहुंचा, उसकी दुर्दशा देखते परिवार के लोग भड़क गए। लोगों का गुस्सा उनकी जुबां पर आ गया। शव देखते ही परिजन भड़क गए। यह देखकर पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए। संभ्रांत लोगों की मदद से पुलिस ने तनावपूर्ण शांति के माहौल में शव का अंतिम संस्कार कराया।
परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद ईशु निवासी शोभापुर, बजरंग पुत्र टैनी, नीशु निवासी दायमपुर और चार-पांच अज्ञात लोगों पर हत्या का केस दर्ज कराया है
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पुलिस ने आरोपी ईशु को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल व बाइक भी बरामद कर ली है। दो नामजद आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है।
पुलिस ने बताया कि मोनू गुर्जर का अधजला शव 23 मार्च को नेशनल हाईवे पर सांईराम कॉलोनी के पीछे गेहूं के खेत में पड़ा मिला था। रविवार देर शव की शिनाख्त हुई थी। रविवार रात ही शव का पीएम कराया गया। पुलिस ने रात में अंतिम संस्कार भी कराने के लिए दबाव दिया, लेकिन परिजनों ने इंकार कर दिया था। सोमवार सुबह करीब छह बजे मोनू का ईंटों से कुचला हुआ व अधजला शव जब गांव में पहुंचा तो शव की दुर्दशा को देखते ही परिजन व परिवार के भड़क गए और दहाड़े दहाड़े मार मारकर रोने लगे।
शव की हालत को देखते हुए महिलाओं को अधिकतर शव से दूर ही रखा गया। परिजन इतने गुस्से में थे कि उनका आक्रोश देखकर पुलिस के हाथ पांव फूल गए। लोग शव को लेकर हाईवे जाम करने तो कभी कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करने की बात करने लगे। बमुश्किल पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद समाज के संभ्रांत लोगों की मदद से परिजनों को समझाबूझाकर कर गांव के श्मशानघाट में शांतिपूर्ण तनाव के माहौल में अंतिम संस्कार कराया। मोनू के भाई प्रिंस ने मुखाग्नि दी।
गोपी के रिश्तेदार ने बुलाया था
आरोपी बजरंग गोपी पारिया की मां शिक्षा देवी की सगी भतीजी का लड़का है। पुलिस ने ईशु को गिरफ्तार कर लिया है। दो आरोपी बजरंग और नीशु फरार हैं। जिनकी तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की टीम भी लगाई है।
बरसी पर पांच लोगों की हत्या का किया था ऐलान
शोभापुर गांव में गोपी हत्याकांड के बाद से ही आरोपी लगातार बदला लेने की धमकी देते रहे हैं। फेसबुक पर गोपी हत्याकांड़ में नामजद चार आरोपी मनोज गुर्जर, आशीष गुर्जर, कपिल चपराणा व सुनील गुर्जर के अलावा अनिल, विष्णु, वाशु, ललित उर्फ चीमा व जोनी सहित नौ लोगों की हत्या करने की फोटो सहित पोस्ट डालकर तो कभी खुले आम धमकी देकर। नौ लोगों की पोस्ट में आशीष गुर्जर का नाम व फोटो सबसे पहले नंबर पर था। जिसकी आरोपियों ने हत्या कर दी। दूसरे नंबर पर अनिल व तीसरे पर सुनील का नाम था। आशीष की हत्या करने के बाद भी आरोपी लगातार लगातार धमकी देते रहते थे। मोनू के चाचा बबलू गुर्जर ने बताया कि आशीष की हत्या के बाद भी आरोपी शांत नहीं बैठे। उन्होंने मोनू के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस को बताया कि आरोपियों ने धमकी दी थी कि 04 अप्रैल को गोपी पारिया हत्याकांड़ को एक साल हो जाएगा। उसकी बरसी पर पांच अप्रैल तक पांच लोगों की और हत्या करनी है। उनके निशाने पर मोनू के चचेरे भाई अनिल व सुनील थे। ये दोनों किसी तरह आरोपियों के हत्थे नहीं चढ़े तो आरोपियों ने मोनू के  दोस्त ईशु को मोहरा बनाकर उसकी हत्या कर दी। मोनू बेहद सीधा लड़का था। वह किसी पर भी भरोसा कर लेता था।
आशीष की हत्या के बाद फिर बनी थी प्लानिंग
गोपी हत्याकांड के बाद आरोपी लगातार उसकी हत्या का बदला लेने की फिराक में लगे रहे। न्यू ईयर से पहले और गोपी की हत्या में नामजद कपिल चपराणा के बर्थडे पर आरोपियों ने हत्या के बदले हत्या का तोहफा देने का ऐलान किया था। जिसके चलते आरोपियों ने खुले आम गोलियां बरसा कर आशीष की हत्या कर दी। उसके बाद भी लोगों की उम्मीद थी कि अब गांव में शांति है, गांव का माहौल सुधर जाएगा लेकिन आरोपी अब भी बाज नहीं आए। आशीष की हत्या के बाद ही आरोपियों ने एक और हत्या की प्लानिंग शुरु कर दी थी। आरोपियों को पता था कि अनिल व सुनील किसी तरह के बहकावे में नहीं आएंगे। इसलिए उन्होंने उनके चचेरे भाई मोनू गुर्जर को निशाना बनाया और उसकी हत्या करने की साजिश शुरु कर दी। उसको जाल में फंसाने के लिए आरोपियों ने उसके दोस्त ईशु को मोहरा बनाया। क्योंकि वे जानते थे कि मोनू व ईशु दोस्त हैं। दोनों साथ में सपा नेता मनोज गुर्जर के कार्यालय पर काम भी करते थे। आशीष के हत्या के बाद भी ईशु मोनू के घर जाता था और उसके साथ खेलता भी था। हालांकि आशीष की हत्या के बाद खराब हुए गांव के माहौल को देखते हुए उसके परिजनों ने उसे हैदराबाद तंदूर की रोटी बनाने के लिए काम पर भेज दिया था। जो 19 मार्च को होली पर छुट्टी लेकर ही गांव आया था। ईशु की बजरंग व नीशु से दोस्ती थी जबकि मोनू की सिर्फ ईशु से ही दोस्ती थी।


फूलप्रूफ प्लानिंग के साथ अंजाम दिया मोनू हत्याकांड  
मेरठ/कंकरखेड़ा। शोभापुर गांव के मोनू गुर्जर हत्याकांड को आशीष गुर्जर मर्डर केस की तरह फूलप्रूफ प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। पुलिस कस्टडी में हत्यारोपी इशू ने इसका खुलासा किया कि उसे मोहरा बनाकर मोनू को शराब पार्टी के बहाने घर से बुलाया गया था। इशू का दावा है कि मोनू से केवल उसी की दोस्ती थी। गोपी पारिया के भांजे बजरंग ने उससे कहा था कि होली पर मोनू को गांव में लेकर आना। जिससे माना जा रहा है कि मोनू की हत्या गोपी पारिया की हत्या के बदले की गई। मोनू हत्याकांड में पुलिस ने बजरंग, इशू और नीशू को नामजद किया है।
सोमवार सुबह थाना कंकरखेड़ा में इशू ने पुलिस के सामने बताया कि गोपी का रिश्तेदार बजरंग पहले ही आशीष गुर्जर व मनोज गुर्जर के परिवार के लोगों को गोपी की हत्या का बदला लेने की धमकी दे चुका था। बजरंग, इशू और नीशू में दोस्ती थी। जबकि मोनू की सिर्फ इशू से ही दोस्ती थी। इशू का दावा है कि बजरंग ने उससे कहा था कि मोनू के साथ पहले होली की पार्टी करेंगे और फिर उसकी हत्या कर देंगे।
गांव में गिल्ली डंडा खेला, शराब पी
इशू ने पुलिस को बताया कि प्लानिंग के तहत 20 मार्च की सुबह करीब 10 बजे वह मोनू पुत्र मांगेराम के घर पहुंचा था। उसे खेलने के बहाने घर से बुलाकर ले आया। उसके बाद दोनों ने गांव की मैदान में गिल्ली डंडा खेला था। आरोपी बजरंग और नीशू अपनी स्पेलेंडर बाइक से वहां पर पहुंचे थे। जिसके बाद इशू अपनी बाइक पर मोनू को लेकर दायमपुर गांव की ओर चल दिया। पीछे-पीछे बजरंग और नीशू भी पहुंच गए थे। यहां एक पूर्व पार्षद के घर चारों ने शराब पी थी।
जंगल में ले जाकर हत्या
बकौल इशू शाम होते ही वह मोनू को शराब पार्टी की बात कहकर जंगल में ले गए थे। वहां हम तीनों ने शराब नहीं पी बल्कि मोनू को जबरन शराब पिलानी शुरू कर दी। जब उसने विरोध किया तो तीनों उस पर टूट पड़े थे। ईंटों से चेहरे व सिर को कुचलते ही मोनू को मौत के घाट उतार दिया था। पहचान मिटाने के लिए बाइक से पेट्रोल निकालकर मोनू के शव पर छिड़ककर आग लगा दी थी।
कानों में गूंजती रही चीख पुकार
इशू ने बताया कि मोनू को चिल्लाता देखकर वह इतना डर गया था कि मौके से भागकर अपने घर पहुंच गया था। मोनू की चीख पुकार उसके कानों में गूंजती रही। 21 मार्च की सुबह वह रिश्तेदारी में भाग गया था। रविवार को मोनू के शव की शनाख्त होने पर जब पुलिस उसके घर पहुंची तो मेरे पिता ने मुझे वहां बुलाया था। जहां मैंने पुलिस को सब सच-सच बता दिया था।
बर्थडे के बाद शराब पार्टी
आशीष गुर्जर की हत्या 15 दिसंबर 2018 को की गई थी। वह गोपी हत्याकांड में उस दिन घर से कचहरी के लिए तारीख पर निकला था। गोपी हत्याकांड में नामजद कपिल चपराणा का उस दिन बर्थडे था, जिसे जेल से तारीख पर आना था। लेकिन आशीष को कपिल का बर्थडे मनाने के बहाने दोस्तों की मदद से घर से खेत पर ले जाया गया था, जहां उसकी हत्या कर दी गई थी। आशीष हत्याकांड में गोपी पारिया के भाई प्रशांत पारिया और पिता ताराचंद पारिया समेत नौ नामजद आरोपी जेल गए थे। उस समय चर्चा थी कि गोपी की हत्या का बदला लेने के लिए 17 युवकों का ग्रुप बना था। जबकि 15 आरोपी नामजद और 25 अज्ञात थे।  
पीएसी के सामने पिस्टल लेकर घूमते हैं आरोपी
मोनू के चचेरे भाई अनिल गुर्जर ने बताया कि आशीष गुर्जर की हत्या के बाद से ही गांव में पुलिस फोर्स तैनात है। बावजूद इसके वे सुरक्षित नहीं हैं। एलानिया हत्याएं हो रही हैं और पुलिस तमाशा देख रही है। गांव में तैनात पीएसी के सामने ही आरोपी पक्ष के लोग पिस्टल लेकर घूमते हैं। पीएसी शिकायत के बाद भी कुछ नहीं करती। ऐसी फोर्स का गांव में तैनात होने का क्या फायदा। आशीष के पिता महक सिंह ने बताया कि 19 मार्च को वह कोर्ट गए थे। इस दौरान गांव के अनुसूचित जाति के कई युवक उनके पीछे लगे थे। वह किसी तरह उन्हें चकमा देकर घर पहुंचे।
गांव में अंतिम संस्कार
सोमवार तड़के पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में मोनू के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मोनू गोपी पारिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी सपा नेता मनोज गुर्जर का भतीजा था। मनोज इस समय जेल में है। समाजसेवी दुष्यंत रोहटा व बसपा नेता नवाब सिंह लखवाया सहित दर्जनों लोगों के साथ पुलिस और मोनू के परिजनों ने गांव में मीटिंग कर शांति बनाने की अपील की।
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गुर्जर समाज में रोष
शोभापुर गांव में इस समय जातीय तनाव की स्थिति बनी है। मोनू की हत्या को लेकर गुर्जर समाज के लोगों में आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि दो अप्रैल को बसपा नेता गोपी पारिया की हत्या के बदले में मोनू गुर्जर को मारा गया। यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले गोपी पारिया के भाई प्रशांत व उसके साथियों ने मिलकर 16 दिसंबर को गोपी पारिया हत्याकांड में नामजद आशीष गुर्जर की हत्या कर दी थी। उस दौरान ऐलान करना बताया कि गोपी पारिया की हत्या के बदले में गुर्जर समाज के कई युवकों के साथ अनहोनी करनी बताई।
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