तिलकराज और हनी भी जयपुर और दिल्ली से वांछित चल रहे थे। दोनों चाचा भतीजे 2014 से पहले भी नायडू के साथ अपराध करते थे। उन्हें फिर से गैंग में शामिल किया।
पूछताछ में तिलकराज ने बताया कि गैंग में नानू सिंह, भगत सिंह, हिमांशु, कालूराम, अलीम, फूलक सिंह समेत 15 अपराधी है। सभी वांटेड हैं। दिल्ली में गैंग पर पुलिस शिकंजा कसने लगी थी। इसके चलते वह वेस्ट यूपी के जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा कर रहा था।
ऋतुराज और रवि से दोस्ती की
हनी की हत्या के दौरान ऋतुराज और उसका ममेरा भाई रवि भी नायडू के साथ थे। ऋतुराज मूल रूप से सिरसली, बिनौली बागपत का है, जबकि रवि भूरा मोहम्मदपुर मुजफ्फरनगर का है।
रवि कई मामले में वांछित है। तिलकराज ने बताया कि रवि अक्सर नायडू के पास आता था। मुजफ्फरनगर, मेरठ व बागपत में अपराध की दुनिया में पैठ जमाने के लिये नायडू ने भूरा से नजदीकी बढ़ाई थी।
नायडू की पत्नी से की थी छेड़छाड़
इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा बिजेंद्र सिंह का कहना है कि राज कुंदरा से लूट के मामले में नायडू के साथ हनी व तिलकराज भी जेल गए थे। नायडू पर मकोका की कार्रवाई हुई थी। अन्य आरोपी जमानत पर थे।
तिलकराज ने नायडू की पत्नी से छेड़छाड़ की थी। इस कारण वह तिलकराज को मारना चाहता था। हालांकि बाद में उनमेें समझौता हो गया था।
प्राॅपर्टी पर था हनी का कब्जा
हनी प्राॅपर्टी डीलिंग का काम करता था। दिल्ली के मदनगीर में करोड़ों की कीमत के एक प्लाट पर हनी और तिलकराज ने कब्जा किया था। नायडू ने प्लाट में बंटवारे की बात कही थी।
हनी ने इनकार कर दिया और उसके फर्जी कागज भी बनाकर अपने पास रख लिए। इसको लेकर नायडू ने दोनों को मारने की प्लानिंग बनाई। इसके चलते वह दोनों को मेरठ लेकर आया था। पुलिस इस बिंदु पर भी बारीकी से जांच कर रही है।