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पुलिस की लापरवाही से गई अपहृत बच्चे की जान

Sun, 18 Sep 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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आठ साल के मासूम गोलू की जान पुलिस की लापरवाही से गई। बुधवार से शुक्रवार रात के बीच बच्चे के परिजनों से 50 लाख की फिरौती मांगी गई। दो आरोपी कब्जे में भी आ गए। लेकिन इस मामले की गंभीरता को नहीं समझ पायी। जब तक सक्रिय हुई, आरोपी बच्चे की हत्या कर चुके थे।
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सिंधावली गांव निवासी किसान आनंद के बेटे गोलू उर्फ निर्विष्ट का बुधवार को अपहरण हुआ था। शुक्रवार को पुलिस ने आनंद के पड़ोसी सौरभ और रिंकू को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर गोलू की लाश गांव के खेत से बरामद की थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए उन्होंने गोलू का अपहरण किया था। गोलू के परिजन और ग्रामीण जंगल में गोलू की सरगर्मी से तलाश कर रहे थे। पकड़े जाने के डर से हमने गोलू की गला दबाकर हत्या कर दी थी। फिर वापस आकर ग्रामीणों के साथ उसे ढूंढने का बहाना कर रहे थे।

सुरक्षित मिल जाता गोलू
आरोपियों ने बताया कि वे बुधवार से ही परिजनों के साथ हमदर्दी जताकर बच्चे की तलाश कर रहे थे। बुधवार शाम तक गोलू जिंदा था। शाम करीब पांच बजे गोलू की तलाश करते परिजन और ग्रामीण उस ईख के खेत में पहुंच, जहां पर गोलू बंधक था। तभी आरोपियों ने ग्रामीणों को यह कहकर रोक दिया था कि इस खेत में पानी भरा हुआ है, यहां पर गोलू नहीं हो सकता। यदि ग्रामीण इस पर ध्यान न देते तो शायद गोलू सुरक्षित मिल जाता।
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ग्रामीणों में आक्रोश
इस वारदात को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस सुरक्षा में बच्चे का अंतिम संस्कार कराया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों सौरभ और रिंकू को जेल भेज दिया।

एक कॉल ने पकड़वाए आरोपी
आरोपी सौरभ ने अपनी भाभी ज्योति के मोबाइल में नया सिम डालकर फिरौती मांगने के लिए गोलू के चाचा आदेश को कॉल की थी। जिसके आधार पर पुलिस ने ज्योति को हिरासत में लिया। पूछताछ में ज्योति ने सौरभ का नाम बताया। सख्ती से पूछताछ हुई तो सौरभ और रिंकू ने पुलिस को सारी बात बता दी। शनिवार को ज्योति को छोड़ दिया गया।

इंसाफ तो हम खुद करेंगे
पुलिस से शुक्रवार दोपहर ही आरोपी सौरभ और रिंकू को उठाया था। शाम सात बजे सौरभ ने वारदात कबूल कर ली। लेकिन पुलिस ने शव को बरामद करना मुनासिब नहीं समझा। क्योंकि ग्रामीणों में दोनों आरोपियों के प्रति गुस्सा था, वह कुछ भी कर सकते थे। पीड़ित परिवार तो पहले ही धमकी दे चुका था कि आरोपी हमें दे दो, हम खुद ही इंसाफ कर देंगे। हालात को देखते पुलिस ने रात एक बजे बच्चे का शव बरामद किया।

इस मासूम ने क्या बिगाड़ा था
गोलू के पिता आनंद और मां बबली का रो रोकर बुरा हाल था। वह बिलखते हुए कह रहे थे कि इस मासूम ने भला किसका क्या बिगाड़ा था। वह तो कुछ जानता भी नहीं था। पैसा मांगा था तो इंतजार करते। उनको 50 लाख रुपया देते। कहीं से बंदोबस्त करने का टाइम तो देते। बच्चे को मारने की क्या जरूरत थी। हमारी तो खुशियां ही छीन लीं।
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