परतापुर के गेझा गांव में सोमवार शाम पिंटू की मौत की खबर आते ही हालात तनावपूर्ण हो गए। जाट पक्ष के लोग जमा होने लगे। पिंटू के परिवार में गम और गुस्सा था। महिलाएं विलाप कर रही थीं। उधर दलित पक्ष में भी दहशत का माहौल बन गया। गांव में तनाव व्याप्त होने पर पुलिस-प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए। परतापुर पुलिस ने गांव में डेरा डाल दिया। रात को पीएसी भी बुला ली गई। जिसे गांव में ही कैंप करने को कहा गया है।
मुठभेड़ में मारा गया था भाई सोनू गेझा
इंस्पेक्टर परतापुर के अनुसार पिंटू का भाई सोनू गेझा 50 हजार का ईनामी और हिस्ट्रीशीटर रहा है। उस पर लूट, डकैती आदि कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। वर्ष 2010 में शताब्दी नगर में परतापुर पुलिस से हुई मुठभेड़ में सोनू गेझा मारा गया था। परिवार में पिंटू और सोनू दो ही भाई थे। अब तीन बहनें रह गई हैं। पिंटू की मौत के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है।
पहले लिखी एनसीआर, बाद में बढ़ाईं धाराएं
इंस्पेक्टर परतापुर के अनुसार रविवार रात मामला मारपीट का था। पिंटू पक्ष की ओर से पिंटू की बहन पूनम और ललित पक्ष की ओर से ललित के भाई दीपू की तहरीर पर अलग-अलग एनसीआर दर्ज कर ली गई थी। दोनों ओर से दो-दो आरोपी बनाए गए थे। घायलों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद धारा 308 बढ़ाकर रिपोर्ट दर्ज की गई। पिंटू की मौत के बाद उनके केस में हत्या की भी बढ़ा दी गई। जबकि पिंटू पक्ष पर एससीएसटी एक्ट लगाया गया है। इंस्पेक्टर के अनुसार ललित और संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।