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नकली उपकरणों से पैथॉलॉजी जांच

Wed, 18 Nov 2015 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
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पैथॉलॉजी लैब में नकली उपकरणों की घुसपैठ ने जांच रिपोर्ट की सत्यता पर ही सवाल उठा दिए हैं। इसका खुलासा मंगलवार को उस समय हुआ, जब मुंबई (महाराष्ट्र) की एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने पुलिस के साथ बच्चा पार्क स्थित एक स्टोर पर छापा मारा।
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इस दौरान भारी मात्रा में नकली उपकरण बरामद किए गए।  कंपनी के प्रतिनिधियों ने दुकानदार के खिलाफ थाना सिविल लाइन पर कॉपी राइट एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।

पुलिस के मुताबिक, प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी टीडीपीएस को सूचना मिली थी कि मुंबई से संचालित कंपनी बोरोसिल के नाम पर मेरठ में डुप्लीकेट उपकरणों की सप्लाई हो रही है। एजेंसी ने कुछ दिनों पहले ही इसकी सूचना बोरोसिल के अधिकारियों को दी।
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इसके बाद से कंपनी के प्रतिनिधि मेरठ में कार्रवाई की तैयारियों में जुट गए। मंगलवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर सिविल लाइन थाने से छापामारी के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराया गया। डिटेक्टिव एजेंसी के फील्ड ऑफिसर कैलाश तिवारी के साथ बोरोसिल के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर मिथिलेश शर्मा और प्रभाकर की टीम ने बच्चा पार्क स्थित बायोएड्स नाम से संचालित स्टोर पर छापा मारा।

इस दौरान टीम को दुकान से भारी मात्रा में पैथॉलॉजी जांच में इस्तेमाल होने वाले डुप्लीकेट मैटेरियल मिले। इसकी कीमत 1.30 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है।

मानकों पर फेल नकली उपकरण
कंपनी के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर मिथिलेश का कहना है कि कांच के उपकरण जांच के मानकों के हिसाब से बनाए जाते हैं। बोरोसिल कंपनी का कांच मैन्युअल पर 250 से 400 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जांच कर सकता है। वजह यह कि कई जांचें उच्च तापमान पर ही संभव हैं।

लेकिन, स्टोर पर बेचे जा रहे उपकरण 20 डिग्री सेल्सियस का तापमान भी नहीं सह पाए। उन्होंने दावा किया कि ऐसे उपकरणों के जरिए किसी भी सूरत में सटीक जांच नहीं हो सकती। इससे साफ है कि अगर इसी क्वालिटी के मैटेरियल से जांच हो रही है तो जनता के साथ धोखा हो रहा है।

मेरठ समेत पश्चिमी यूपी में सप्लाई
बायोएड्स से मेरठ ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई पैथॉलॉजी लैब में कांच के उपकरण सप्लाई किए जाते हैं। मेरठ जिले में करीब 2451 पैथॉलॉजी लैब हैं। इनमें रोजाना करीब 10 हजार मरीजों की जांच होती है।

इस हिसाब से यदि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो यदि 10 फीसदी लैब में ही नकली मैटेरियल का प्रयोग हो रहा है तो स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिल रही है।

मुसीबत तो मरीजों के सामने है
कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर डुप्लीकेट उपकरणों से पैथॉलॉजी लैब में जांच की जा रही है तो जनता के साथ धोखा हो रहा है। दावा किया कि इन उपकरणों के सहारे किसी भी सूरत में जांच रिपोर्ट सही नहीं आएगी।

ऐसे में मरीजों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। आखिर वे लैब की रिपोर्ट पर भरोसा न करें तो क्या करें, क्योंकि उनके पास यह परखने का कोई रास्ता नहीं है कि उपकरण असली हैं या नकली।
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