पुलिस का दावा है कि इससे पहले ही असबाब की अधिवक्ता के माध्यम से हत्यारोपी पक्ष से वार्ता हुई, जिसमें समझौते के नाम पर उनसे रुपये ले लिए गए, लेकिन शपथपत्र कोर्ट में दाखिल नहीं किए गए। जब इस संबंध में असबाब पर दबाव बनाया गया तो उसने संबंधित अधिवक्ता ही बदल दिया। इसके चलते हत्यारोपी पक्ष ने असबाब की हत्या की साजिश रची।
बता दें कि 11 मार्च को दीपक ने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर असबाब की खतौली में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। असबाब की हत्या में भी उसके भाइयों के पांच हत्यारोपियों के साथ ही वासु उर्फ उत्तम उर्फ दीपक के साथ ही साजिशकर्ता के रूप में मनजीत उर्फ टोनी पुत्र सुशील मूंछ का भी नाम सामने आया है। अन्य सभी हत्यारोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। बताया कि दीपक हाल में काफी समय से सुशील मूंछ के यहां रह रहा था।
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