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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: कड़ी सुरक्षा के बीच तत्कालीन जेलर की कोर्ट में गवाही, अब 16 को अगली सुनवाई

Fri, 06 Dec 2019 12:03 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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बागपत जेल और लाल घेरे में बर्खास्त जेलर उदय प्रताप सिंह - फोटो : अमर उजाला
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बागपत जिला कारागार में पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मुकदमे में वादी तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह ने सुरक्षा के बीच अदालत पहुंचकर गवाही दी। जिला जज राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत में गवाही हुई। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

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नौ जुलाई 2018 को जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन जेलर यूपी सिंह ने जेल में बंद सुनील राठी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने सुनील राठी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चर्चित प्रकरण का ट्रायल जिला जज राम मनोहर नारायण मिश्रा की कोर्ट में चल रहा है। शुक्रवार को सुरक्षा के बीच तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह ने जिला जज की अदालत में पहुंचकर गवाही दी। वादी की गवाही की प्रक्रिया पूरी हो गई। अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता मौजूद रहे। वहीं सुरक्षा कारणों से तिहाड़ जेल से सुनील राठी को अदालत तक नहीं लाया गया।

यह भी पढ़ें: मुन्नाबजरंगी हत्याकांड: जांच में हुआ था ये बड़ा खुलासा, जेलर उदय के कंट्रोल से बाहर हो गई थी जेल

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दो गवाह पहुंचे, शेष की गवाही के लिए समन
इस मामले में दो गवाह गवाही दे चुके हैं। चिक काटने वाले सिपाही की गवाही पहले ही हो चुकी है। उदय प्रताप सिंह को उनके पैतृक गांव से सुरक्षा के बीच अदालत तक लाया गया। अन्य गवाहों को समन भेजा गया है।

ये था मामला
बड़ौत से बसपा के पूर्व विधायक एवं वर्तमान में भाजपा नेता लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से साल 2017 में मोबाइल के जरिये रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस की जांच में मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था। इसी मामले में आठ जुलाई 2018 की रात बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था। नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे बजरंगी की तन्हाई बैरक के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद शासन ने प्रकरण की जांच कराई थी। लापरवाही उजागर होने पर तत्कालीन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, मुख्य बंदी रक्षक अरजिंदर सिंह और माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था।

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