सीसीएसयू के छात्रसंघ चुनाव में उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ा था। साथ मिलकर वोट मांगते थे और तैयारी करते थे। अब आपस में इस ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद किसी को आसानी से भरोसा नहीं हो रहा था कि ऐसा हो गया। योगेश मोरल की ग्रुप में भूमिका शांत और समझदार व्यक्ति की है। वह हमेशा झगड़े टालने और बीचबचाव करने में आगे रहता है। यही वजह है कि बीटेक छात्रों के साथ मारपीट करने पर उसकी छात्रसंघ अध्यक्ष देवेश राणा और विजय धामा से कहासुनी हुई।
योगेश कैंपस में इतिहास विभाग में एमफिल का छात्र है। देवेश राणा को चुनाव लड़ाने वाला यही शख्स है। देवेश का चचेरा भाई योगेश का सीनियर रहा है। समाजवादी छात्रसभा से प्रत्याशी बनाने में योगेश की भूमिका अहम रही। चुनाव लड़ाने में भी वह सबसे आगे रहा। योगेश की कैंपस में इमेज ग्रुप में सबसे अच्छी है। इसका फायदा ग्रुप को मिला। चुनाव लड़ाने में विजय धामा भी शामिल रहा। सबका साथ उठना-बैठना था। कुछ दिनों से विवाद चल रहा था। बीटेक छात्रों पर दबंगई दिखाने का योगेश ने विरोध किया था।
राजदीप मेरे गोली लग गई....
कैंटीन पर जब फायरिंग हुई तो आसपास काफी छात्र जमा थे। समाजवादी छात्रसभा के जिला अध्यक्ष राजदीप विकल केपी हॉस्टल में थे। फायरिंग की आवाज सुनकर वह फौरन कैंटीन की तरफ पहुंचे। गोली चलने पर शुरू में योगेश को पता नहीं चला कि उसे भी गोली लगी है। उसने अरुण खटाना को कहा तुझे गोली लगी है। इतने देर में खून निकलने पर योगेश की भी हालत बिगड़ गई। राजदीप मौके पर पहुंचे तो योगेश ने कहा, राजदीप मेरे गोली लग गई। यह कहकर वह नीचे गिर पड़ा। छात्रों ने दोनों घायलों को फौरन आनंद अस्पताल पहुंचाया।
कैंपस में डर नहीं, रखते हैं हथियार
विवि कैंपस में उपद्रवी छात्रों और हमलावरों को जरा भी डर नहीं है। वह असलाह रखते हैं। फायरिंग करते हैं। छात्रों को पीटकर भाग जाते हैं। लिखित शिकायत आने के बाद कार्रवाई होती है। लेकिन विवि प्रशासन और सिक्योरिटी का उन्हें जरा भी डर नहीं है। चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति होती है। पिछले दिनों एमपी हॉस्टल में फायरिंग और तोड़फोड़ हुई थी। उधर, हाल में मेरठ कॉलेज में छात्रों ने फायरिंग की थी। शिक्षण संस्थानों में फायरिंग और मारपीट की घटनाएं प्रॉक्टोरियल बोर्ड, पुलिस और सिक्योरिटी को खुली चुनौती दे रही हैं।
पुलिस का वांटेड विजय धामा
छात्रनेता विजय धामा पुलिस का वांटेड है। उस पर तेजगढ़ी पुलिस चौकी में घुसकर दरोगा से मारपीट, छात्रों के साथ अभद्रता, मारपीट और छात्रा से बदसलूकी करने के कई मामले में मेडिकल थाने में दर्ज है। समाजवादी छात्रसभा का नेता बताकर शहर में खुलेआम घूमता था। छात्रों ने इसकी शिकायत भी की, बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। छात्रसंघ चुनाव प्रचार कराने में वांटेड होने के बावजूद भी विजय धामा सबसे आगे था।