तीन तलाक मामले में मुस्लिमों की खाप पंचायत होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पीड़िता और उसके वकील से पूछा कि क्या मुस्लिमों में भी खाप पंचायत होती है। इस पर पीड़िता ने वह तलाकनामा दिखाया, जिस पर 20 से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर हैं।
नौचंदी थाना क्षेत्र के ढबाईनगर निवासी आयशा का निकाह सरफराज से हुआ था। दंपती में विवाद हो गया। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। आयशा के अनुसार, 17 जून को इस मामले में पंचायत बुलाई गई। भरी पंचायत में पति ने उसे तलाक दे दिया। 31 अगस्त को आयशा ने पति के खिलाफ तलाक का मुकदमा दर्ज कराया।
इसके बावजूद पांच सितंबर को सरफराज ने मोदीनगर में दूसरा निकाह कर लिया। सरफराज पुलिस के हाथ नहीं आ सका है। आयशा ने 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके इस मुस्लिम खाप पंचायत से जवाब तलब करने की मांग की थी। दो सितंबर को यह याचिका दाखिल हुई।
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वहीं बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस की खंडपीठ में इस केस पर पहली सुनवाई हुई। दो सदस्यीय खंडपीठ ने हाईकोर्ट के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट में केस दायर करने पर आपत्ति जताई। आयशा की ओर से इस केस की पैरवी कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि जब यह याचिका दायर की गई, उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में हड़ताल थी।
हाईकोर्ट खुलने का इंतजार नहीं किया जा सकता था, क्योंकि आयशा का पति सरफराज दूसरे निकाह की तैयारी कर रहा था। इसलिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया है। यदि वहां सुनवाई नहीं हुई, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले हुए हैं।
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