फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हत्याकांड: बेटे पर मां का सुहाग उजाड़ने का आरोप, अब परिवार को सिर्फ इंसाफ का इंतजार

Thu, 03 Jan 2019 04:43 PM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
हत्याकांड में पकड़े गए आरोपी और हत्या के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

लाखों की संपत्ति और सरकारी नौकरी पाने की खातिर बेटे पर पांच लाख की सुपारी देकर अपनी मां का सुहाग मिटवाने का आरोप लगा। आरोपी बेटे को सजा दिलाने के लिए मां और उसकी पत्नी गवाह बन गईं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अब चार्ज बनने के बाद गवाही होनी बाकी है। पीड़ित पक्ष को इंसाफ का इंतजार है।

विज्ञापन


सरेशाम हुई थी हत्या 
दीनदयाल आर्य (59) पुत्र छोटेराम निवासी मसूरी इंचौली सदर तहसील में राजस्व निरीक्षक थे। 22 अक्तूबर 2016 की शाम वह ड्यूटी खत्म कर निकले ही थे कि सदर तहसील के गेट पर दो बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। दीनदयाल की मौके पर मौत हो गई थी। दीनदयाल के बेटे मोंटी उर्फ वरुण विशाल आर्य ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ देहली गेट थाने में केस दर्ज कराया था। इस मुकदमे की विवेचना देहली गेट थानाध्यक्ष ने की थी।

कुख्यात सतीश गिरी से मरवाया था पिता 
इस हत्याकांड के बाद सदर बाजार पुलिस ने कस्टडी से भागे कुख्यात सतीश गिरी और उसके साथी सुरेंद्र राणा को गिरफ्तार किया था। आईपीएस सिद्धार्थ मीणा और दरोगा जयवीर सिंह ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की थी। सतीश गिरी पर 15 हजार रुपये का इनाम था और वह शातिर अपराधी के साथ सजायाफ्ता मुल्जिम था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि सदर तहसील पर राजस्व निरीक्षक की हत्या उन्होंने पांच लाख की सुपारी लेकर की। दावा किया था कि सुपारी दीनदयाल के बेटे ने दी थी। पुलिस ने वादी मोंटी को पिता की हत्या की साजिश रचने (120 बी) का मुल्जिम बनाया था। 

नौकरी पाना था मकसद 
पुलिस के अनुसार दीनदयाल आर्य की सेवानिवृत्ति में एक साल बचा था। विवेचना में सामने आया था कि बेटे मोंटी की संगत सही नहीं थी। उसकी योजना थी कि यदि पिता को मरवा दिया जाए तो उनकी सरकारी नौकरी उसे मिल जाएगी। सरकारी फंड और हत्या का मोटा क्लेम भी मिल जाएगा। कामकाज न करने पर मोंटी का अक्सर घर पर झगड़ा होता था। एक मामले में साल 2015 में वह जेल गया था, जहां उसकी मुलाकात कुख्यात सतीश गिरी से हुई। पुलिस कस्टडी से भागने के बाद सतीश गिरी से मोंटी से संपर्क किया। तभी इस वारदात को अंजाम दिया गया।

तमंचे और गोली का मिलान हुआ 
एसओ देहलीगेट विजय गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल से एक तमंचा बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दीन दयाल के शरीर से एक गोली निकली थी। दोनों को तत्कालीन एसओ बिरेंद्र सिंह यादव ने जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब आगरा भेजा था। चार मई 2018 को एफएसएल की रिपोर्ट आई, जिसमें साबित हुआ कि जिस तमंचे से गोली चली है, वही गोली दीनदयाल के शरीर से मिली है। इसकी रिपोर्ट एसओ देहलीगेट ने कोर्ट में प्रस्तुत कर दी, जिससे केस और मजबूत हो गया। 

गवाह बने, अभी गवाही बाकी 
सीनियर अधिवक्ता विमल तोमर के मुताबिक दीनदयाल आर्य की हत्या के मामले में 32 गवाह बनाए गए हैं। जिसमें दीनदयाल की पत्नी सावित्री, पुत्रवधू मधू, चश्मदीद गवाह असलम, इरशाद समेत 32 गवाह बनाए थे। केस जिला जल की कोर्ट में चल रहा है। किसी भी गवाह की गवाही नहीं हुई। अगली तारीख चार फरवरी लगी है, जिसमें गवाहों को प्रस्तुत होकर आरोपियों के खिलाफ गवाही देनी है।
विज्ञापन

आरोपी बेटा जमानत पर बाहर
एसओ देहलीगेट विजय गुप्ता के मुताबिक दीनदयाल आर्य की हत्या में बेटे मोंटी और सुरेंद्र राणा जमानत पर हैं। जबकि कुख्यात सतीश गिरी अभी जेल में बंद है। केस की पैरवी दीनदयाल की पत्नी सावित्री कर रही है। पुलिस के मुताबिक सावित्री कहती है कि पति के हत्यारोपियों को सजा होनी चाहिए। इसको लेकर वह बेटे व अन्य आरोपियों के खिलाफ गवाह बनी थी। एसओ ने बताया कि पूरा केस पलट गया है। वादी ही आरोपी बनाया गया है। 

तथ्यात्मक कार्यवाही की जरूरत
पुलिस ने विवेचना कर आरोपियों को नामजद किया। उनके खिलाफ सुबूत जुटाकर मजबूत विवेचना भी की है। जिस केस में वादी ही मुल्जिम बन जाए, उसमें पुलिस को तथ्यात्मक कार्यवाही करनी होती है। पुलिस ने कई मजबूत साक्ष्य जुटाए और एफएसएल रिपोर्ट में भी मिलान हुआ है। - अखिलेश कुमार, एसएसपी 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें