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मुठभेड़: आखिर क्यों हर बदमाश के हाथ में पिस्टल की जगह मिलता है तमंचा, ये रही बड़ी वजह

Thu, 20 Dec 2018 05:23 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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चाहे मुठभेड़ हो या दबिश, यदि किसी से पिस्टल पकड़ी जाती थी तो उसे शातिर अपराधी या शार्प शूटर माना जाता था। लेकिन अपराध की दुनिया में अब यह कहानी बदल गई है। अब चाहे शातिर और इनामी अपराधी हो या फिर लुटेरा या गोतस्कर, अधिकांश मुठभेड़ में पुलिस की कहानी में उसके कब्जे से तमंचा ही बरामद होता है। 

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बदमाशों के हाथों से पिस्टल गायब हो चुकी हैं। सवाल यह भी है कि बदमाश हाईटेक पुलिस पर तमंचों से फायर कर कानून व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अवैध तमंचे कहां से आ रहे हैं, इसका जवाब तक पुलिस के पास नहीं है। 

इस साल पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुठभेड़ की 85 घटनाएं हो चुकी हैं। जिनमें 80 प्रतिशत मुठभेड़ में बदमाशों के पास तमंचे मिले हैं। भले ही इनामी अपराधी कितना शातिर हो और उसका आपराधिक रिकॉर्ड बड़ा हो। लेकिन हैरानी की बात है कि उसके पास पिस्टल के बजाय तमंचा ही मिलेगा। वहीं, बड़ा सवाल यह भी है कि ये अवैध तमंचे बदमाशों के पास पहुंच कहां से रहे हैं। इंचौली थाना क्षेत्र के लावड़ इलाके में एसपी देहात राजेश कुमार ने अवैध तमंचों का जखीरा पकड़ा था। इसके अलावा सरधना और किठौर क्षेत्र में सबसे ज्यादा तमंचे बरामद हुए हैं। यहां तक कि गोतस्करी के मामलों में भी मुठभेड़ के बाद आरोपियों से तमंचे ही बरामद हो रहे हैं।

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ऑन डिमांड होती है सप्लाई 
पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आता कि शहर और देहात के खास इलाकों में तमंचों को कारीगरों से तैयार कराकर उनकी ऑन डिमांड सप्लाई की जाती है। कई मामलों में तमंचा बनाने के आरोपियों के नाम पतों का खुलासा हो चुका है। कई घरों में तमंचों के साथ ही मुंगेर ब्रांड पिस्टल बनाने की फैक्टरी का भी पर्दाफाश हो चुका है। लेकिन उसके बाद भी तमंचे बनना और बरामद होना बंद नहीं हो रहा। सवाल है कि जब पुलिस को सारे ठिकानों का पता है तो ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती। 

नहीं तोड़ पा रहे नेटवर्क 
कमोवेश हर मुठभेड़ में बदमाश से तमंचा बरामद होना बताया जाता है। यदि उसका कोई साथी फरार हो जाता है तो कहा जाता है कि वह तमंचे से फायर कर फरार हो गया। गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि तमंचा 15 सौ रुपये से दो हजार रुपये में खरीदा था। जबकि अवैध पिस्टल 15 से 20 हजार रुपये में सप्लाई होती हैं। ऐसे में साफ है कि अपराध करने के लिए तमंचे ही बदमाशों की पहुंच में आसानी से हैं और पुलिस तमंचे का यह नेटवर्क तोड़ नहीं पा रही है।

केस- 1 तमंचे से एसओ पर दागी गोली
वारदात 17 दिसंबर की रात की है। एसओ मेडिकल सतीश कुमार को सूचना मिली कि स्कूटी सवार दो युवक अवैध हथियार लेकर जा रहे हैं। गढ़ रोड से हापुड़ रोड को जोड़ने वाली इनर रिंग रोड पर पुलिस की जीप पहुंची तो दोनों युवकों ने एसओ पर तमंचे से गोली चला दी। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो करीम उर्फ कलीम के पैर में गोली जा लगी। वहीं दूसरा बदमाश इमरान फरार हो गया। पुलिस को मौके से तीन तमंचे मिले।

केस- 2 गोतस्कर ने तमंचा थामा
खरखौदा के खासपुर गांव के जंगल में 12 दिसंबर की रात पुलिस गोकशी की सूचना पर पहुंची तो एक गोवंश वहां मिला। जब तक पुलिस समझती उससे पहले ही गोतस्कर ने पुलिस पर तमंचे से गोली चला दी। जबकि दूसरा आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने गोली चलाई तो गोविंदपुर निवासी अंते घायल हो गया। पुलिस ने मौके से तमंचा बरामद किया।
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केस- 3 पकड़ने की कोशिश पर ताना तमंचा
मुंडाली के जंगल में सात दिसंबर को गोकशी की सूचना पर एसओ मुंडाली रितेश कुमार फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस ने पांच हजार के इनामी इमामुद्दीन को घेरा तो उसने पुलिस पर तमंचा तान दिया। इमामुद्दीन अपने भाई आजाद के साथ बाइक छोड़कर जंगल में भागने लगा। बाद में दोनों ने तमंचे से एसओ पर गोली चला दी। पुलिस ने फायरिंग की तो पैर में गोली लगने से दोनों घायल हो गए। 

केस- 4
रोका तो तमंचे से चलाई गोली

30 नवंबर को एसओ हस्तिनापुर को सूचना मिली कि दो बदमाश बाइक से किसी घटना को अंजाम देने जा रहे हैं। पुलिस ने बदमाशों को रोका तो एक बदमाश ने पुलिस पर तमंचे से गोली चला दी। पुलिस ने भी गोली चलाई तो एक बदमाश शमीम को लगी। मौके से पुलिस को एक तमंचा मिला।

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