अतिशय अपहरण कांड से पुलिस को सबक लेना होगा। अपराधी तकनीकी सिस्टम से लगातार मजबूत हो रहे हैं, जबकि पुलिस जंग लगी तकनीकी से इनका पीछा कर रही है। अपहरण जैसे मामलों में परिजन यदि समझदारी से काम न लें तो आगे की कोई गारंटी नहीं। सूचना तंत्र बेकार हो चुका है, संगीन मामलों में ढुलमुल रवैया रहता है। आला पुलिस अधिकारी महकमे के इन हालातों को लेकर चिंतित हैं। आईजी जोन सुजीत पांडेय ने जल्द ही क्राइम ब्रांच, सविलांस टीम की बैठक लेकर पेंच कसने की बात कही है। हाईटेक बदमाशों की अपडेट सूची भी मांगी है।
पिछड़ गई मेरठ पुलिस
अतिशय अपहरण कांड के आरोपी प्रतीक और तुषार कंप्यूटर टेक्नालॉजी के मास्टर हैं। इनमें तुषार तो मेरठ साइबर सेल का एक्सपर्ट रहते हुए कई केसों में मेरठ पुलिस की मदद कर चुका था। अतिशय के अपहरण के बाद उन्होंने तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया, जिसमें मेरठ पुलिस पिछड़ती नजर आई।
अब जागेगी खाकी
अपहरणकर्ताओं का टारगेट मासूमों को अगवा कर फिरौती मांगना है। अतिशय के अपहरणकर्ता पांच स्कूलों की रेकी कर चुके थे। अतिशय से पहले उनके निशाने पर केएल इंटरनेशनल का एक छात्र था। आईजी ने जहां मेरठ पुलिस को तकनीकी रूप से दक्ष करने की बात कही है तो एसएसपी ने कहा कि स्कूलों के गेट पर कैमरे लगवाए जाएंगे। जिस संबंध में स्कूल प्रशासन से बातचीत की जाएगी।