पुलिस अंकल! मैं कातिलों को जिंदा नहीं छोड़ूंगी। किसने मेरे मम्मी- पापा को मारा है? डॉक्टर को बुलाकर उन्हें अस्पताल तो पहुंचवा देते। किसने मेरे घर का यह हाल किया है कि चारों तरफ खून ही खून पड़ा हुआ है। कोई तो बता दे कि आखिर किसने मेरा घर इस तरह से बर्बाद कर दिया है। पुलिस अंकल सौ नंबर पर जिसने सूचना दी, उसका भी नाम नहीं बता रहे। चंद्रशेखर की बेटी डॉ. प्रियंका जुनून में पुलिस अफसरों से यही कहे जा रही थीं।
बीमा कंपनी के मैनेजर चंद्रशेखर गुप्ता, उनकी पत्नी पूनम और एक अन्य युवती की हत्या से शास्त्रीनगर सेक्टर-पांच में सनसनी फैल गई थी। हत्या की सूचना पर शास्त्रीनगर सेक्टर-6 में रहने वाले चंद्रशेखर के भाई संजय गुप्ता और दोनों बहनें भी वहां पहुंच गईं थीं। भाई व भाभी के शव देखकर संजय का दिल बैठ गया। पुलिस ने उन्हें किसी तरह संभाला। बेटी और बेटा घर पहुंचे तो मम्मी-पापा के शव देखकर चौखट पर ही बेहोश हो गए।
चंद्रशेखर की बेटी डॉ. प्रियंका (एमबीबीएस, एमडी) की करीब आठ साल पहले शादी हो चुकी है। जो गाजियाबाद में रेडियोलॉजी सेंटर चलाती हैं। आईआईटी मुंबई से पास आउट उनके पति विनय एक कंपनी में इंजीनियर हैं। वहीं, इकलौते बेटे अंचित गुप्ता ने गाजियाबाद आईएमएस से बीटेक किया था। जो अब नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। जिनकी अभी शादी नहीं हुई है।
प्रियंका ने बिलखते हुए कहा कि वह रोजाना मम्मी, पापा से फोन पर बात करती रहती थीं। शनिवार सुबह करीब 11:40 बजे मैंने मम्मी से बात की थी। मम्मी ने कहा था घर पर ठीक से रहना। कोई परेशानी तो नहीं है? शाम करीब छह बजे फिर कॉल की तो पापा का फोन स्विच ऑफ था। मैंने मम्मी के मोबाइल पर कॉल की तो कोई बार-बार उसे डिस्कनेक्ट कर रहा था। एसपी सिटी ने कहा कि उस समय क्राइम ब्रांच की टीम पहुंच गई थी। हो सकता है कि कि सी सिपाही ने फोन काट दिया हो। बेटे अंचित ने पुलिस को बताया कि दोपहर 12 बजे उसने अपने पापा से फोन पर बात की थी।
हे भगवान! आज घर आ जाता तो बच जाती जान
इक लौते बेटे अंचित ने पुलिस को बताया कि उसका शनिवार और रविवार को अवकाश रहता है। इसलिए वह शनिवार को शास्त्रीनगर अपने घर आ जाता था। लेकिन एक जगह काम में फंस गया तो घर नहीं आ सका। फिर भी दोपहर को अपने पापा से फोन पर बातचीत की थी। बेटे ने बिलखते हुए कहा कि यदि आज भी वह अपने घर आ जाता तो शायद मेरे मम्मी-पापा की जान बच सकती थी।
मम्मी, अब तुम किसकी शादी देखोगी?
अंचित ने कहा कि उसकी मम्मी और पापा ने बड़े शौक से उसे पढ़ाया था। कुछ समय से मम्मी कह रही थी कि बेटा अब तेरी नौकरी भी लग गई, तेरी अच्छी तरह से शादी करूंगी। लेकिन इससे पहले ही मम्मी-पापा दुनिया से चले गये। अंचित ने रोते हुए कहा कि मम्मी अब तुम किसकी शादी देखोगी?
तिहरे हत्याकांड से छावनी में तब्दील हुआ शास्त्रीनगर
शहर की कानून व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन दिन से जहां लूट और डकैती की घटनाओं को लेकर भाजपाईयों और व्यापारियों में आक्रोश था। वहीं शनिवार शाम को शास्त्रीनगर जैसे पॉश इलाके में एक मकान में तीन लोगों के क त्ल की सूचना ने पुलिस अफसरों को सड़कों पर उतार दिया। शास्त्रीनगर में तिहरे हत्याक ांड के बाद यदि मौके पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स को भारी संख्या में तैनात किया तो इसी से साफ जाहिर हो रहा था कि अब कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंप दी गई।
बृहस्पतिवार को सदर क्षेत्र में अरिहंत ज्वैलर्स की दुकान में मालिक अंकुर जैन को बंधक बनाकर लाखों की डकैती, टीपीनगर मंडी में पेट्रोल पंप मालिक करमजीत शेखो से 8.51 की लूट और ड्राईवर जयसिंह को गोली मारने की घटना के अलावा चार लूट की और घटनांए हुई थी। जिसके बाद व्यापारियों और भाजपाईयों ने सीओ से हाथापाई करते हुए बंधक बना लिया। शुक्रवार को फिर से रेलवे रोड क्षेत्र में डॉक्टर के घर लाखों की डकैती पड़ गई।
व्यापारयिों और भाजपा नेताओं के आगे पुलिस अफसर लगाता कानून व्यवस्था को लेकर बैकफुट पर आ गये। शास्त्रीनगर में शनिवार को तीन लोगों के कत्ल ने तो शास्त्रीनगर ही नहीं शहर के लोगों को भी हिलाकर रख दिया। पहले अंदेशा था कि लूट या डकैती के बाद हत्या की गई है। जैसे ही सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक रविन्द्र भड़ाना, विनीत अग्रवाल शारदा, सेंट्रल मार्केट के अध्यक्ष किशोर वाधवा, नरेंद्र राष्ट्रवादी समेत अन्य भाजपाई और व्यापारी मौके पर पहुंच गये।
करीब एक हजार से अधिक लोगों का शास्त्रीनगर में जमावड़ा लग चुका था। आईजी आशुतोष पाण्डे, डीआईजी लक्ष्मी सिंह, एसएसपी जे. रविन्द्र गौड, एसपी सिटी ओपी सिंह, एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन, भारी फोर्स और पीएसी के साथ पहुंचे तो भीड़ ने पुलिस को घेर लिया।
भाजपाईयों की कई बार एसपी सिटी से नोंकझोक हुई। जिसमें भीड़ ने एसपी सिटी से धक्का मुक्की भी कर दी। बाद में जब भाजपाईयों और व्यापारियों को पता चला कि मामला लूट के बाद हत्या का नहीं है, दूसरी तरफ पुलिस शक जता रही है जिसके बाद भाजपाईयों ने अपने कदम पीछे खींच लिये।
लोगों को डराने के लिए बुलाई है सीआरपीएफ: भाजपा विधायक रविन्द्र भड़ाना और भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत शारदा को जब सीआरपीएफ के जवानों ने अंदर जाने से रोका तो वह भड़क गये। एसपी देहात और एसपी सिटी से विधायक ने तल्ख लहजे में कहा कि लूट, डकैती और हत्या थम नहीं रही जनता को डराने के लिए सीआरपीएफ लगा दी है। अफसरों को यह मानना पड़ेगा कि कानून व्यवस्था के हालाल बिगड़ गये हैं यह नहीं सुधरी तो प्रशासन आगे की तैयारी कर ले।