फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

ऑनर किलिंग: बहनों के कातिल बन गए राखी वाले हाथ, झकझोर देगी ये घटनाएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रैना पालीवाल Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Dec 2019 01:21 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
शबीना के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला

बचपन से भाइयों को घर में खुद से ऊपर पाया। पानी, चाय, खाना सब उनके हाथों में दिया। दोयम होकर भी भाइयों पर प्यार लुटाती रहीं। हर साल बड़ी खुशी से उनकी कलाई पर राखी बांधतीं। उन्हीं राखी वाले हाथों ने बहनों की बेरहमी से हत्या कर दी। जिनके साथ, जिनके बीच रहकर वे पली-बढ़ीं, वही उनके कातिल बन गए। ऐसे कातिल जिन्हें अपने किए का कोई अफसोस नहीं हैं। आम बातों पर बेटियों की हत्या आम हो गई है...

पुरुषवादी समाज के ये वो क्रूर चेहरे हैं जो झूठी आन के नाम पर अपनी बहन-बेटियों की बलि लेते आए हैं। वह तड़पती रहीं, जान की भीख मांगती रहीं पर वे नहीं पसीजे। उनका दम निकल गया पर वे वार करते रहे। इतना निर्मम भी कोई हो सकता है। मुजफ्फरनगर में इसी साल ऑनर किलिंग की दिल दहला देने वाली दो घटनाएं हुईं। जिनकी केस हिस्ट्री झकझोर देती है। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी है लेकिन लड़ाई लंबी है।



यह भी पढ़ें: हत्यारों के न हाथ कांपे न कलेजा, झूठी शान पर कुर्बान हुईं बेटियां, ये था उनका गुनाह

विज्ञापन

शबीना के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
बचपन से भाइयों को घर में खुद से ऊपर पाया। पानी, चाय, खाना सब उनके हाथों में दिया। दोयम होकर भी भाइयों पर प्यार लुटाती रहीं। हर साल बड़ी खुशी से उनकी कलाई पर राखी बांधतीं। उन्हीं राखी वाले हाथों ने बहनों की बेरहमी से हत्या कर दी। जिनके साथ, जिनके बीच रहकर वे पली-बढ़ीं, वही उनके कातिल बन गए। ऐसे कातिल जिन्हें अपने किए का कोई अफसोस नहीं हैं। आम बातों पर बेटियों की हत्या आम हो गई है...

पुरुषवादी समाज के ये वो क्रूर चेहरे हैं जो झूठी आन के नाम पर अपनी बहन-बेटियों की बलि लेते आए हैं। वह तड़पती रहीं, जान की भीख मांगती रहीं पर वे नहीं पसीजे। उनका दम निकल गया पर वे वार करते रहे। इतना निर्मम भी कोई हो सकता है। मुजफ्फरनगर में इसी साल ऑनर किलिंग की दिल दहला देने वाली दो घटनाएं हुईं। जिनकी केस हिस्ट्री झकझोर देती है। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी है लेकिन लड़ाई लंबी है।

यह भी पढ़ें: हत्यारों के न हाथ कांपे न कलेजा, झूठी शान पर कुर्बान हुईं बेटियां, ये था उनका गुनाह

25 जनवरी 2019 को मंसूरपुर के बोपाड़ा गांव में आदेश ने अपनी बहन की गोलियां मारकर हत्या कर दी। एक हफ्ते पहले उसकी बहन अपने दोस्त के साथ रेस्टारेंट गई थी। वहां कुछ शोहदों ने उसके साथ छेड़खानी की। परिजनों ने इसकी एफआईआर भी दर्ज कराई। 

इस घटना के बाद से ही आदेश अपनी बहन से नाराज था। एक दिन उसे इसी मामले में बयान देने के लिए थाने ले जाने के बहाने घर से ले गया। रास्ते में तमंचे से उस पर गोलियों की बौछार कर दी। उसकी नफरत इस हद तक थी कि दो गोली मारने के बाद भी उसके हाथ नहीं रुके। जबकि उसकी बहन पहले ही दम तोड़ चुकी थी। इस नृशंस हत्या को अंजाम देने के बाद आदेश थाने गया और अपना जुर्म कुबूल किया। उसने कहा कि उसे अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। इज्जत से बड़ा कुछ भी नहीं है।

प्रेम विवाह की खता पर मौत की सजा

कवाल स्थित शबीना के मायके में मातम पसरा है। शाम के वक्त जब अमर उजाला टीम ने द्वार खटखटाया तो पूरा परिवार रोता-बिलखता मिला। शबीना ने तीन महीने पहले प्रेम विवाह किया था। घरवालों ने उसे मायके आने से मना कर दिया था। उसके शौहर नौकरी के लिए सऊदी अरब चले गए थे। शबीना अपने घरवालों से मिलने मायके आ गई। छह अक्टूबर 2019 को उसका भाई सनव्वर नौकरी करके घर आया। उसे वहां देख वह आपा खो बैठा। उसने शबीना की गोली मारकर हत्या कर दी। शबीना के पिता जफर अहमद भरे गले से कहते हैं, मेरी तबीयत खराब थी। मुझे देखने के लिए शबीना घर आई। हमने कहा, बेटा! तू यहां क्यों आई। रात में अपनी अम्मी के पास सोई। अगले दिन बेटे ने उसे...।  अब तो सांसें पूरी करनी है। जीते जी बेटे को घर में नहीं घुसने दूंगा। अम्मी नूरजहां बेटी को याद कर फफकती हैं।

क्या कहते हैं समाजशास्त्री 
समाज की संरचना और मूल्य पितृ सत्तात्मक हैं। इन मूल्यों के खिलाफ जो भी जाता है, वह हिंसा का शिकार होता है। पुरुषों को परिवार की प्रतिष्ठा को किसी भी कीमत पर बचाना होता है। उनकी नजर में ऑनर महिलाओं के चरित्र से ही जुड़ा है। ये घटनाएं परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती हैं। इन मामलों में परिवार की बड़ी-बुजुर्ग महिलाओं का भी बहुत रोल होता है। उस अवस्था तक आते-आते उनका समाजीकरण भी बहुत हद तक पितृ सत्तात्मक हो जाता है। परिवार में इस तरह की घटना होने पर वह पुरुषों को उकसाने का काम करती हैं। जेंडर रेशियो नेगेटिव होने से ये घटनाएं बढ़ जाती हैं। - डॉ. अमरजीत, एसोसिएट प्रोफेसर, समाज शास्त्र विभाग, मेरठ कॉलेज

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next