बचपन से भाइयों को घर में खुद से ऊपर पाया। पानी, चाय, खाना सब उनके हाथों में दिया। दोयम होकर भी भाइयों पर प्यार लुटाती रहीं। हर साल बड़ी खुशी से उनकी कलाई पर राखी बांधतीं। उन्हीं राखी वाले हाथों ने बहनों की बेरहमी से हत्या कर दी। जिनके साथ, जिनके बीच रहकर वे पली-बढ़ीं, वही उनके कातिल बन गए। ऐसे कातिल जिन्हें अपने किए का कोई अफसोस नहीं हैं। आम बातों पर बेटियों की हत्या आम हो गई है...
पुरुषवादी समाज के ये वो क्रूर चेहरे हैं जो झूठी आन के नाम पर अपनी बहन-बेटियों की बलि लेते आए हैं। वह तड़पती रहीं, जान की भीख मांगती रहीं पर वे नहीं पसीजे। उनका दम निकल गया पर वे वार करते रहे। इतना निर्मम भी कोई हो सकता है। मुजफ्फरनगर में इसी साल ऑनर किलिंग की दिल दहला देने वाली दो घटनाएं हुईं। जिनकी केस हिस्ट्री झकझोर देती है। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी है लेकिन लड़ाई लंबी है।