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नकली पेट्रोल-डीजल मामला: मजिस्ट्रियल जांच बैठाने वाले डीएम के तबादले की कोशिशों में तेल माफिया

Sat, 24 Aug 2019 05:55 PM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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डीएम मेरठ अनिल ढींगरा - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में तेल माफियाओं का नेटवर्क कितना प्रभावशाली है, इसे पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारियों की कार्यशैली को देखकर पता लगाया जा सकता है। इस प्रकरण में जहां पुलिस अधिकारी ही दो खेमों में बंट गए हैं, तो जिला प्रशासन के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। वहीं सरकारी मशीनरी में यह चर्चा भी होने लगी है कि इस प्रकरण में मजिस्ट्रियल जांच बैठाने वाले डीएम अनिल ढींगरा के तबादले की कोशिशों में तेल माफिया लग गए हैं।

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पुलिस-प्रशासन की साठगांठ से यह धंधा कई दशक से धड़ल्ले से चल रहा था। इसी संरक्षण का नतीजा रहा कि यह कारोबार साल दर साल बढ़ता गया। पहले जहां एक तेल माफिया था, अब चार बड़े माफिया हो गए हैं। कुछ अन्य तेल कारोबारी इनके सहयोगी बन गए। इस धंधे की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा नौकरशाही के साथ ही नेताओं को भी जाता है, जिससे इन्हें शह मिलती है। इस बीच अचानक शहर के एक पुलिस अधिकारी के संज्ञान में यह मामला आया और उन्होंने आईपीएस अधिकारी को कार्रवाई की कमान सौंप दी। उक्त अधिकारी ने जैसे ही नकली तेल के कारोबार का पर्दाफाश किया, तो पूरा तंत्र हिल गया। स्थिति ये हो गई कि पुलिस के चार आला अधिकारियों में से दो इस कार्रवाई को लेकर असंतुष्ट हो गए। अधिकारियों का एक गुट जहां इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की बात कहने लगा, तो दूसरा मामला निपटाने की बात करने लगा।

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वहीं समाचार पत्रों में मामला बढ़ा तो ऐसे अधिकारी बैकफुट पर आकर चुप्पी साध गए। जो अधिकारी कार्रवाई पर आमादा थे, जब उन्हें तेल माफिया की सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ का अहसास हुआ तो वे भी थोड़ा घबरा गए। लेकिन जितनी कार्रवाई हो चुकी है, उसके बाद अब उनके सामने विकट स्थिति आ गई है। यदि वे प्रकरण को बीच में छोड़ते हैं, तो उन पर अंगुली उठेगी और कार्रवाई हो सकती है। यदि वह निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं तो तेल माफिया का सिंडिकेट उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। 

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यही हाल जिला प्रशासन का भी है। क्योंकि इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई का एक बड़ा हिस्सा जिलाधिकारी व उनके अधीनस्थ विभागों से भी जुड़ता है। डीएम ने इस प्रकरण पर मजिस्ट्रियल जांच बैठाते हुए आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर शुक्रवार को कार्रवाई कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन देर शाम होते-होते चर्चा होने लगी कि डीएम का कदम तेल माफिया को रास नहीं आया और अब उनके स्थानांतरण का दबाव बनाया जा रहा है।

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