वहीं समाचार पत्रों में मामला बढ़ा तो ऐसे अधिकारी बैकफुट पर आकर चुप्पी साध गए। जो अधिकारी कार्रवाई पर आमादा थे, जब उन्हें तेल माफिया की सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ का अहसास हुआ तो वे भी थोड़ा घबरा गए। लेकिन जितनी कार्रवाई हो चुकी है, उसके बाद अब उनके सामने विकट स्थिति आ गई है। यदि वे प्रकरण को बीच में छोड़ते हैं, तो उन पर अंगुली उठेगी और कार्रवाई हो सकती है। यदि वह निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करते हैं तो तेल माफिया का सिंडिकेट उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
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यही हाल जिला प्रशासन का भी है। क्योंकि इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई का एक बड़ा हिस्सा जिलाधिकारी व उनके अधीनस्थ विभागों से भी जुड़ता है। डीएम ने इस प्रकरण पर मजिस्ट्रियल जांच बैठाते हुए आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर शुक्रवार को कार्रवाई कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन देर शाम होते-होते चर्चा होने लगी कि डीएम का कदम तेल माफिया को रास नहीं आया और अब उनके स्थानांतरण का दबाव बनाया जा रहा है।
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