वहीं पुलिस ने चार्जशीट में बताया था कि पुष्पेंद्र की बालिका के गांव में रिश्तेदारी थी। वह गांव में आता रहता था। घटना वाली रात को भी वह गांव में ही था। देर रात बालिका लघुशंका के लिए जंगल की ओर आई थी। वहां पुष्पेंद्र पहले से ही खड़ा था। वहां से पुष्पेंद्र ने बालिका को उठा लिया। उसने खेत में ले जाकर बालिका से दुष्कर्म किया और नाम खुलने के डर से उसने बालिका की गला घोंटकर नृशंस हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार पुष्पेंद्र ने बालिका की हत्या के बाद खुद शक से बचने के लिए उसकी परिजनों के साथ खेत में तलाश भी कराई थी। वह शव बरामद होने के बाद भी काफी देर तक गांव में रहा था। अदालत ने अभियुक्त पुष्पेंद्र को दोषी मानते हुए हत्या की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साक्ष्य छिपाने के आरोप में दो साल के कठोर कारावास, धारा चार पोक्सो एक्ट में दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ये सभी सजाएं एकसाथ चलेंगी। अदालत ने आरोपी पर कुल 22 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड में से 15 हजार रुपये मृतका के पिता को देने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने दो सगे भाइयों को उम्रकैद और दो को 10-10 साल की सजा सुनाई, जुर्माना भी लगाया
इस साल की पहली सजा
पोक्सो एक्ट में वादों की सुनवाई करने के लिए प्रशासन गंभीर है। पोक्सो की अदालत में करीब 420 केस चल रहे हैं। इस साल में पोक्सो के केस में पहली सजा सुनाई गई है। पोक्सो केस की जल्द सुनवाई के लिए शासन ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। किसी भी पोक्सो कोर्ट में लापरवाही न करने व प्रत्येक तारीख पर गवाहों को आने को कहा गया है।
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