बदमाशों में पुलिस की गहरी पैठ
पुलिस और बदमाशों की गहरी पैठ है। बदन सिंह बद्दो, सुशील मूंछ, सुंदर भाटी, योगेश भदौड़ा और अन्य कई शातिर अपराधी पुलिस के संपर्क में रहते हैं। फरारी होने या जेल में बंद होने के बावजूद भी पुलिस इन कुख्यातों की मदद करती है। इसके कई सुबूत पुलिस को मिले, बावजूद मजबूत कार्रवाई नहीं हुई। सुशील मूंछ की फरारी में भी इसकी पोल खुली थी। लेकिन सिस्टम की बदनामी के चलते पुलिस अधिकारी भी खामोश बैठे रहे। यही वजह बनीं कि बद्दो की फरारी होते ही पुलिस से साठगांठ कर सुशील मूंछ सरेंडर हो गया।
देखकर अनदेखी करती है पुलिस
जिला पंचायत चुनाव में पब्लिक और पुलिस अधिकारियों ने बखूबी देखा है। कुख्यात योगेश भदौड़ा की पत्नी सुमन भदौड़ा जीती और फिर एक पार्टी के प्रत्याशी को पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में वोट देकर आई। जबकि सुमन हत्या के मामले में वांछित चल रही थी। पुलिस और बदमाशों की आंख मिचौली को किसने नहीं देखा। चर्चा भी रही कि एक पार्टी ने सुमन को पहले ही भरोसा दिलाया था कि वोट करने के दौरान उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी। हुआ भी कुछ ऐसा ही। पुलिस की इस खामोशी के पीछे क्या वजह हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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