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कवाल कांड को लेकर अलर्ट, आरएएफ व पीएसी मांगी गई

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- शासन के निर्देश पर पुलिस के उच्च अधिकारियों ने तैयार किया एहतियत के तौर पर सुरक्षा का प्लान
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- मुजफ्फरनगर और शामली में संवेदनशील क्षेत्रों के लिए रिजर्व कर दी गई फोर्स
- आरएएफ के मेरठ सेंटर के अलावा पीएसी की दोनों वाहिनियों से भी मांगी फोर्स
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। कवाल कांड को लेकर मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों के लिए आरएएफ और पीएसी मांगी गई है। शासन ने गोपनीय ढंग से पुलिस के उच्च अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी कड़े निर्देश दिए हैं। पूरे मामले को लेकर सभी जिलों में पुलिस ने सुरक्षा प्लान तैयार कर लिया है। फोर्स को जहां मूवमेंट में रखने के निर्देश दिए हैं वहीं बची हुई फोर्स को रिजर्व किया गया है।
कवाल कांड में सचिन और गौरव की हत्या के बाद ही मुजफ्फरनगर में दंगा सुलगा था। इसके बाद मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और वेस्ट के अन्य जिलों में भी पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करनी पड़ी थी। दंगा प्रभावित क्षेत्रों में सेना ने मोर्चा संभाला था। बुधवार को कवाल कांड के आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा पर सुनवाई के लिए आठ फरवरी की तारीख नियत की गई तो शासन ने सभी जिलों के डीएम और पुलिस कप्तानों को सुरक्षा संबंधी कड़े निर्देश दे दिए।
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एक पुलिस अधिकारी के अनुसार मुजफ्फरनगर और शामली के अलावा अन्य जिलों में भी बुधवार को सुरक्षा का कड़ा पहरा रहा, लेकिन आठ फरवरी के लिए आरएएफ की 108 वाहिनी मेरठ से फोर्स मांगी गई है। 44वीं वाहिनी पीएसी हापुड़ रोड और छठी वाहिनी पीएसी (आरआरएफ) रुड़की रोड से भी फोर्स मांगी गई है। सुरक्षा का पूरा प्लान अधिकारियों ने तैयार कर लिया गया है। इसमें कहा गया कि जिन स्थानों पर फोर्स की जरूरत है वहां तत्काल आरएएफ और पीएसी भेज दी जाएगी। मेरठ के लिए भी एक कंपनी आरएएफ और पीएसी की मांग की गई है।
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सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर
सोशल मीडिया पर नजर रखने को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया लैब और साइबर सेल के अलावा सर्विलांस टीम और एसटीएफ भी निगरानी के लिए लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर कोई भी वीडियो या फोटो मुजफ्फरनगर दंगे जैसी स्थिति का वायरल किया गया तो ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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