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दहशत और डर के बीच बीते वो 12 घंटे 21-31-06-Ghaziabad city

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फोर्स कम होने से ग्रामीणों के आगे नहीं टिक सकीं सुरक्षा एजेंसियां
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मोदीनगर। लुधियाना (पंजाब) के आरएसएस नेता के हत्याराें को हथियार मुहैया कराने वाले सप्लायर मलूक को पकड़ने पहुंचीं सुरक्षा एजेंसियां एनआईए, एटीएस, एसओजी और स्थानीय पुलिस की टीम पर महिलाओं और गांव वासियों ने करीब 25 मिनट तक पथराव किया। फोर्स कम होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां ग्रामीणों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकीं और पूरी फोर्स को उल्टे पांव लौटना पड़ा। हथियार सप्लायर मलूक तो मौके से फरार हो गया लेकिन गांव में 12 घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने गांव में सर्च ऑपरेशन चलाया लेकिन मलूक हाथ नहीं लगा। कई गांव वाले भी उसके साथ भाग निकले। पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया है।
सुबह करीब पांच बजे एनआईए, एसओजी और एटीएस की टीम भोजपुर थाने पहुंची। यहां से स्थानीय पुलिस को लेकर छह पुलिस वाहनों से टीम नहानी गांव पहुंची और हथियार सप्लायर मलूक के घर में दबिश दी। टीम मलूक को पकड़कर बाहर घसीट लाई। इस दौरान मलूक के भाइयों और चाचा ने गांव वासियों को अलर्ट कर दिया। पुलिस टीम मलूक को वाहन में बैठाकर ले जाने लगी तो भीड़ ने रास्ता रोक लिया। एनआईए, एटीएस और पुलिस को रुकना पड़ा। इतने में गांव वासियों ने पथराव कर दिया। मलूक वाहन से उतरकर भागा तो एसओजी टीम ने उसे पकड़ा। गन्ने के खेत में मलूक और टीम के बीच गुत्थमगुत्था हुई, लेकिन मलूक छूटकर भाग निकला। उसने एसओजी टीम पर फायर कर दिया। टीम ने भी फायर किया लेकिन मलूक फायरिंग करता भागने में सफल हो गया। करीब 25 मिनट तक पथराव हुआ, जिसके बाद एनआईए समेत बाकी जांच एजेंसियों की टीम सुबह करीब छह बजे थाना भोजपुर लौट आई। बाद में जिले के सभी थानों से फोर्स और पीएसी मंगाई गई और दोपहर करीब डेढ़ बजे भारी फोर्स के साथ एनआईए, एटीएस व पुलिस अधिकारी फिर नहाली गांव पहुंचे। गांव में फ्लैग मार्च निकालने के साथ ही कांबिंग की गई लेकिन गांव में सिर्फ महिलाएं ही घरों में मिलीं। सर्च के बाद एक युवक को हिरासत में लिया गया, जिसे थाने में लाकर पूछताछ की गई। शाम साढ़े चार बजे फिर से थाने में एक मीटिंग हुई जो करीब दो घंटे तक चली। मीटिंग के बाद बाहर से बुलाई गई फोर्स को लौटा दिया गया। एनआईए की टीम भी लौट गई। शाम सात बजे तक अफरातफरी और तनाव का माहौल रहा।
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छतों पर पत्थर लिए खड़ी थीं महिलाएं
जब फोर्स दोबारा गांव पहुंची तो घरों की छत पर महिलाएं हाथों में पत्थर लिए खड़ी थीं, हालांकि इस दौरान महिलाओं की ओर से कोई पथराव नहीं किया गया। पुलिस की ओर से कार्रवाई होती तो दोबारा पथराव हो सकता था। वारदात की सूचना पर गांव पहुंचे मीडिया कर्मियों से भी गांववासी उलझ गए। उन्हें गांव के अंदर आने नहीं दिया गया।
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पुलिस ने नहीं ली मलूक की तलाशी
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद मलूक के पास कट्टा कैसे आया, यह सवाल अब भी बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि उसके पास तमंचा पहले से ही था लेकिन पुलिस अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की चूक की वजह से उसकी तलाशी नहीं ली गई। इसके बाद उसने अफसरों पर फायरिंग कर दी। पुलिस सूत्रों की मानें तो मलूक के साथ ही गांववासियों ने भी फायरिंग की है।
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