एक मोबाइल कॉल से अपहरणकर्ताओं तक पहुंची पुलिस
मेरठ। बागपत रोड स्थित एक होटल में रहकर दिल्ली पुलिस की टीम पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रही थी। कई संदिग्ध नंबरों को सर्विलांस पर लिया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार मंगलवार रात अपहरणकर्ता परतापुर तिराहे पर लगे एक कांवड़ शिविर में घूमने आए थे। यहां पर एक बदमाश ने अपना मोबाइल चालू करके कहीं बात की। पुलिस ने ये नंबर ट्रेस कर लिया। इसकी लोकेशन परतापुर गांव स्थित एक यूरिया गोदाम के पास मिली। पुलिस को शक हुआ कि गोदाम के पास ही बदमाशों ने कहीं चिकित्सक को बंधक बनाकर रखा हुआ है। इस पर दिल्ली पुलिस की टीमों ने परतापुर पुलिस के साथ वहां घेराबंदी कर कई मकानों में दबिश दी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार शाम करीब तीन बजे ये मोबाइल फिर से ऑन हुआ। उसकी लोकेशन शताब्दी नगर के सेक्टर 4 बी की मिली। इसके बाद पुलिस सक्रिय हो गई। एक टीम सटीक लोकेशन पता करने में जुट गई। दिल्ली पुलिस ने अपने मुख्यालय सूचना देकर दिल्ली, शाहदरा आदि स्थानों से टीम बुला ली और मुठभेड़ के बाद श्री कांत को मुक्त कराया।
दस्तक देते ही की फायरिंग
मेरठ। पुलिस ने जिस मकान में दबिश दी। वह केवल 50 गज में बना था। मकान की दो मंजिल थी। पुलिस टीम ने जिस वक्त मकान में दबिश दी। मकान अंदर से बंद था। पुलिस ने जैसे ही मकान के दरवाजे से दस्तक दी। अंदर से फायर शुरू हो गए । पुलिस टीमों ने अपनी गाड़ी और दीवारों की ओट लेकर फायरिंग की। पुलिस की गोली एक बदमाश को लगने के बाद वह कुछ ढीले पड़े।
पत्नी बच्चे चले गए थे
मेरठ। मुठभेड़ स्थल के मोहल्ले वालों ने बताया कि सोहनवीर की छवि अच्छी नहीं है। वह प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त का काम करता है। तीन चार साल पहले उसने यहां मकान खरीदा था। उसके तीन बेटियां हैं। करीब दो तीन महीने पहले उसकी पत्नी अपनी बेटियों को लेकर यहां से चली गई थी। अब वह अके ला ही यहां रहता है।